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सुख-दुःख

25 जुलाई
दुख के दिनों की दीनता, सुख के दिनों का दंभ ।
मानवता की मौत सम,   तुच्छ बोध प्रारंभ ॥1॥

कर्म शत्रु   संघर्ष से,   जगे   सुप्त सौभाग ।
दुख में दर्द लुप्त रहे, सुख में जगे विराग ॥2॥


दरिद्रता में दयावान बन,   वैभव में विनयवान ।
सतवचनों पर श्रद्धावान बन, पुरूषार्थ चढे परवान ॥3॥

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9 responses to “सुख-दुःख

  1. Udan Tashtari

    25/07/2010 at 4:25 पूर्वाह्न

    अच्छी सीख दोहों के माध्यम से.

     
  2. M VERMA

    25/07/2010 at 7:02 पूर्वाह्न

    बहुत बढ़िया .. सीख देते दोहे

     
  3. Arvind Mishra

    25/07/2010 at 9:47 पूर्वाह्न

    सुख में जगे विराग बेहतर

     
  4. सुज्ञ

    25/07/2010 at 9:55 पूर्वाह्न

    समीर जी,वर्मा जी,अरविन्द जी,आभार, प्रोत्साहन के लिए, आपार खुशी हुई आप पधारे।

     
  5. हमारीवाणी.कॉम

    25/07/2010 at 10:30 अपराह्न

    हमारीवाणी का लोगो अपने ब्लाग पर लगाकर अपनी पोस्ट हमारीवाणी पर तुरंत प्रदर्शित करें हमारीवाणी एक निश्चित समय के अंतराल पर ब्लाग की फीड के द्वारा पुरानी पोस्ट का नवीनीकरण तथा नई पोस्ट प्रदर्शित करता रहता है. परन्तु इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है. हमारीवाणी में आपका ब्लाग शामिल है तो आप स्वयं हमारीवाणी पर अपनी ब्लागपोस्ट तुरन्त प्रदर्शित कर सकते हैं.इसके लिये आपको नीचे दिए गए लिंक पर जा कर दिया गया कोड अपने ब्लॉग पर लगाना होगा. इसके उपरांत आपके ब्लॉग पर हमारीवाणी का लोगो दिखाई देने लगेगा, जैसे ही आप लोगो पर चटका (click) लगाएंगे, वैसे ही आपके ब्लॉग की फीड हमारीवाणी पर अपडेट हो जाएगी. कोड के लिए यंहा क्लिक करे

     
  6. Parul

    25/07/2010 at 10:49 अपराह्न

    sir bahut acche dohe hai 🙂

     
  7. दीर्घतमा

    26/07/2010 at 10:47 पूर्वाह्न

    आपका दोहा बहुत ही उपदेशनात्मक हैबहुत अच्छा लगाधन्यवाद

     
  8. सुज्ञ

    26/07/2010 at 11:32 पूर्वाह्न

    पारूल जी,सुबेदार जी,बहुत बहुत धन्यवाद!!

     
  9. अमित शर्मा

    27/07/2010 at 9:01 अपराह्न

    @ दरिद्रता में दयावान बन, वैभव में विनयवान ।अगर सब कोई ऐसा ही करें तो क्या ही अच्छा हो

     

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ज्ञानदत्त पाण्डेय का हिन्दी ब्लॉग। मैं गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर रेलवे अफसर।

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