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॥सुख- दुःख॥

25 जुलाई

सुख- दुःख

दुख के दिनों की दीनता, सुख के दिनों का दंभ ।
मानवता की मौत सम, तुच्छ बोध प्रारंभ ॥1॥

कर्म शत्रु संघर्ष से, जगे सुप्त सौभाग ।
दुख में दर्द लुप्त रहे, सुख में जगे विराग ॥2॥

दरिद्रता में दयावान बन, वैभव में विनयवान ।
सतवचनों पर श्रद्धावान बन, पुरूषार्थ चढे परवान ॥3॥
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8 responses to “॥सुख- दुःख॥

  1. honesty project democracy

    25/07/2010 at 2:29 अपराह्न

    दरिद्रता में दयावान बन, वैभव में विनयवान ।सतवचनों पर श्रद्धावान बन, पुरूषार्थ चढे परवान ॥३एकदम सत्य वचन ,ऐसा करने से सभी दुखों से भी निजात मिल सकती है …

     
  2. honesty project democracy

    25/07/2010 at 2:33 अपराह्न

    वर्ड वेरिफिकेसन हटा दें ,इसका कोई फायदा नहीं ..

     
  3. honesty project democracy

    25/07/2010 at 2:38 अपराह्न

    प्रोफाइल में अपना सही फोटो लगायें ,इतना अच्छा लिखने वाले को लोग और हम देखना और बात भी करना चाहेंगे | प्रोफाइल को पूरा करें उसमे फोन,इ.मेल इत्यादि का विवरण भी भरें |

     
  4. अनामिका की सदायें ......

    25/07/2010 at 3:09 अपराह्न

    बहुत सुंदर भाव.

     
  5. सुज्ञ

    25/07/2010 at 3:43 अपराह्न

    जय कुमार जी,वर्ड वेरिफिकेसन हटा दिया है,प्रोफाइल में अपना सही फोटो लगाने के बारें प्रथम तो यह प्रतीक मेरें नाम,स्वभाव आदि पर सब कुछ बयान कर जाता है,और इस से एक लगाव भी है।प्रोफाइल,सम्पर्क विवरण आदि,आज कल ब्लोग-जगत पर फ़ैल रहे वैर विद्वेष से अलिप्त रहने का प्रयास मात्र है। छुपाने का मक़्सद न कोई दुर्भावना है न कोई भय। कडवा सत्य कह्ने से स्वयं को रोक नहिं पाता,वैसे भी जिन्दगी में काम बहुत है,नये कार्य क्यों बढाएं।पर आपको मेल से प्रोफाइल अवश्य भेजुंगा।

     
  6. सुज्ञ

    25/07/2010 at 3:46 अपराह्न

    अनामिका जी,इसी तरह प्रोत्साहन संबल का सेतू बनाए रखें

     
  7. संगीता स्वरुप ( गीत )

    25/07/2010 at 6:48 अपराह्न

    ज्ञान प्रदान करते दोहे….अच्छे लगे

     
  8. सुज्ञ

    25/07/2010 at 7:12 अपराह्न

    आभार संगीता जी,सरहना का शुक्रिया

     

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ज्ञानदत्त पाण्डेय का हिन्दी ब्लॉग। मैं यह ब्लॉग लिखने के अलावा गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। रेलवे से ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर्ड अफसर।

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