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ब्लॉगजगत, संतब्लॉगर और आशिर्वाद

25 दिसम्बर

ब्लॉगजगत में एक संत ब्लॉगर, ब्लॉग दर ब्लॉग घूम रहे थे। साथ एक शिष्यब्लॉगर भी था। संतब्लॉगर छांट-छांट कर ब्लॉग्स पर आशिर्वाद – टिप्पणियाँ कर रहे थे। अच्छे विचारों वाले ब्लॉग्स पर आशिर्वाद देते “आपका ब्लॉग न जमें”  और दुर्विचारों वाले ब्लॉग्स पर आशिर्वाद देते “आपका ब्लॉग, पोस्ट-दर-पोस्ट से हरा भरा रहे”
शिष्यब्लॉगर को बडा आश्चर्य हो रहा था, उसने पूछा महात्मन् यह क्या? आप बुरे विचार फ़ैलाने वालों को तो पोस्टों से भरने-फूलने का आशिर्वाद दे रहे है, और अच्छे ब्लॉग्स को उजडने का?
संतब्लॉगर ने शिष्य को समझाते हुए कहा- अच्छे विचारवान ब्लॉगर कहीं भी जाय, हमेशा अच्छे विचारों का प्रसार ही करेंगे, जब उनके ब्लॉग नहिं जमेंगे तो वे निश्चित ही दूसरे ब्लॉग पर अच्छे विचारों की टिप्पणीयां करेंगे, जिससे अच्छे विचारों का प्रसार होगा।
शिष्यब्लॉगर- तो फ़िर दुर्विचारों वाले ब्लॉग्स को अधिक पोस्ट का आशिर्वाद क्यों?
संतब्लॉगर- वे दुर्विचार वाले ब्लॉगर, मात्र अपने ब्लॉग पर लिखने में ही व्यस्त रहेंगे।इसतरह उन्हें दूसरे ब्लॉग्स पर कुविचार टिप्पणियाँ करने का समय ही नहीं मिलेगा। जिससे दुर्विचार का फैलाव न होगा, और दुर्विचार उनके अपने ब्लॉग तक सीमित हो जाएँगे। जिन पाठको का सद्विचार से दूर दूर तक कोई नाता न होगा, वे पाठक ही उन ब्लॉग्स पर जाएगें। और इस तरह दुर्विचारों का प्रसार व प्रचार न हो पाएगा।
शिष्यब्लॉगर, संतब्लॉगगुरू  की औजस्वी निर्मलवाणी में छिपी दूरदृष्टि देख नतमस्तक हो गया।
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26 responses to “ब्लॉगजगत, संतब्लॉगर और आशिर्वाद

  1. संगीता स्वरुप ( गीत )

    25/12/2010 at 3:36 अपराह्न

    गाँव वाली कथा का नवीनी करण ….सटीक ..

     
  2. सुज्ञ

    25/12/2010 at 3:50 अपराह्न

    सही पहचाना दीदी,यह गांव वाली बोध-कथा का ब्लॉगीकरण है।

     
  3. Kunwar Kusumesh

    25/12/2010 at 4:19 अपराह्न

    सुज्ञ जी,आपने पुरानी कथा का ब्लोगीकरण कर दिया..

     
  4. राज भाटिय़ा

    25/12/2010 at 4:41 अपराह्न

    आज आप का लेख पढ कर लगा की सच मे भारत आधुनिक हो गया, बहुत मस्त लिखा महाराज एक बुढिया को जींस ओर टी शर्ट पहना दी, धन्य हे जी:)

     
  5. Gourav Agrawal

    25/12/2010 at 4:41 अपराह्न

    बहुत सुन्दर रूपांतरण है .. आनंद आ गया

     
  6. Gourav Agrawal

    25/12/2010 at 4:44 अपराह्न

    पर मैं तो यही कहूँगा "आपका ब्लॉग जमा रहे" और आगे से आपकी टिप्पणियाँ ध्यान से पढनी पढ़ेंगी लगता है :))))

     
  7. Gourav Agrawal

    25/12/2010 at 4:47 अपराह्न

    सुधार :और आगे से आपकी टिप्पणियाँ ध्यान से पढनी होंगी लगता है :))))

     
  8. सुज्ञ

    25/12/2010 at 4:56 अपराह्न

    गौरव जी,@"आपका ब्लॉग जमा रहे"ताकि आप सद्विचार टिप्पणियां फ़ैलाते जाएँ? अकेले ही???

     
  9. Babli

    25/12/2010 at 5:09 अपराह्न

    आपको एवं आपके परिवार को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनायें !

     
  10. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    25/12/2010 at 5:24 अपराह्न

    नानक वाणी के साथ सुज्ञ जी के स्वर सुनकर,बस यही कामना है कि प्रार्थना में जब भी उठें मेरे हाथ तो यही माँगें कि आपका कहना सच हो!!

     
  11. anshumala

    25/12/2010 at 5:46 अपराह्न

    अच्छे विचार हर जगह हर समय में ऐसे ही लागु हो जाते है जैसे आप ने नानक विचार का ब्लॉग के लिए किया है |

     
  12. Gourav Agrawal

    25/12/2010 at 5:52 अपराह्न

    @सुज्ञ जी …. हमारा काम तो पूरा हुआ ….. २०१० जो पूरा हुआ :)) …..शुभकामनाएं 🙂

     
  13. Gourav Agrawal

    25/12/2010 at 5:56 अपराह्न

    कुछ एक दो अच्छी अच्छी पोस्ट के जरिये कहेंगे बाय बाय

     
  14. सुज्ञ

    25/12/2010 at 6:02 अपराह्न

    गौरव जी,आपका काम पूरा कहाँ हुआ? यह तो मात्र ईस्वी साल खत्म हुआ है।हम तो नये साल पर नये अवतार में आपका स्वागत करेंगे।

     
  15. नीरज गोस्वामी

    25/12/2010 at 6:05 अपराह्न

    bhai bahut khoob…kya door ki kaudi laayen hain aap…waah.neeraj

     
  16. भारतीय नागरिक - Indian Citizen

    25/12/2010 at 6:58 अपराह्न

    गुरू नानक जी के विचारों को आधुनिक और सामयिक रूप में रखने के लिये बधाई..

     
  17. वन्दना

    25/12/2010 at 7:03 अपराह्न

    गुरु नानक के उपदेश का सही सदुपयोग किया है।

     
  18. ZEAL

    25/12/2010 at 8:53 अपराह्न

    इस प्रेरक प्रसंग के लिए आपका आभार।

     
  19. VICHAAR SHOONYA

    26/12/2010 at 2:28 अपराह्न

    गुरु नानक जी की कथा का ये ब्लोगीकरण बढ़िया है.

     
  20. वन्दना

    26/12/2010 at 5:58 अपराह्न

    आपकी अति उत्तम रचना कल के साप्ताहिक चर्चा मंच पर सुशोभित हो रही है । कल (27-12-20210) के चर्चा मंच पर आकर अपने विचारों से अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।http://charchamanch.uchcharan.com

     
  21. सतीश सक्सेना

    26/12/2010 at 9:52 अपराह्न

    बहुत खूब सुज्ञ जी अच्छा प्रस्तुतिकरण ! हार्दिक शुभकामनायें !

     
  22. उपेन्द्र ' उपेन '

    26/12/2010 at 11:38 अपराह्न

    भाई जी हम भी नत मस्तक हो गयें ऐसे ज्ञान के पीछे………… कमाल का ज्ञान है. अच्छी लगी ये प्रस्तुति . फर्स्ट टेक ऑफ ओवर सुनामी : एक सच्चे हीरो की कहानी

     
  23. वाणी गीत

    27/12/2010 at 8:23 पूर्वाह्न

    कई बार सुनी पढ़ी कथा ब्लॉगजगत के लिए भी सही सन्देश दे रही है ..

     
  24. अन्तर सोहिल

    28/12/2010 at 5:08 अपराह्न

    सुन्दर बहुत अच्छी लगी जी यह पोस्टप्रणाम

     
  25. sada

    30/12/2010 at 4:07 अपराह्न

    बहुत ही सुन्‍दर एवं सार्थक प्रस्‍तुति …आभार ।

     

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