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॥व्यर्थ वाद विवाद॥

29 जुलाई

विचारधाराओं पर वर्तमान में उपस्थित वाद विवाद को समर्पित दोहांजली।

व्यर्थ वाद विवाद………

बौधिक उलझे तर्क में, कर कर वाद विवाद।
धर्म तत्व जाने नहिं, करे समय बर्बाद॥1॥

सद्भाग्य को स्वश्रम कहे, दुर्भाग्य पर विवाद ।
कर्मफ़ल जाने नहिं, व्यर्थ तर्क सम्वाद ॥2॥

कल तक जो बोते रहे, काट रहे है लोग ।
कर्मों के अनुरूप ही, भुगत रहे हैं भोग ॥3॥

कर्मों के मत पुछ रे, कैसे कैसे योग ।
भ्रांति कि हम भोग रहे, पर हमें भोगते भोग ॥4॥

ज्ञान बिना सब विफ़ल है, तन मन वाणी योग।
ज्ञान सहित आराधना, अक्षय सुख संयोग॥5॥
________________________________________________

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13 टिप्पणियाँ

Posted by on 29/07/2010 in बिना श्रेणी

 

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13 responses to “॥व्यर्थ वाद विवाद॥

  1. राजभाषा हिंदी

    30/07/2010 at 7:50 पूर्वाह्न

    बहुत अच्छी प्रस्तुति।राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

     
  2. शारदा अरोरा

    01/08/2010 at 1:14 अपराह्न

    बहुत अर्थ पूर्ण लिखा है ।

     
  3. सुज्ञ

    01/08/2010 at 1:23 अपराह्न

    शारदा जी,सराहना के लिये आभार!!

     
  4. कविता रावत

    02/08/2010 at 6:29 अपराह्न

    ज्ञान बिना सब विफ़ल है, तन मन वाणी योग।ज्ञान सहित आराधना, अक्षय सुख संयोग॥5॥..satya vachanbahut sundar prastuti

     
  5. सुज्ञ

    02/08/2010 at 8:23 अपराह्न

    कविता जी,आभार आपका!!

     
  6. Rajey Sha

    04/08/2010 at 3:19 अपराह्न

    बेहतर प्रयास।

     
  7. सुज्ञ

    04/08/2010 at 11:07 अपराह्न

    राजेय जी,आभार आपका

     
  8. Akshita (Pakhi)

    05/08/2010 at 2:40 अपराह्न

    बहुत अच्छा लिखा आपने…________________________'पाखी की दुनिया' में 'लाल-लाल तुम बन जाओगे…'

     
  9. संगीता स्वरुप ( गीत )

    13/08/2010 at 11:54 पूर्वाह्न

    बहुत अर्थ पूर्ण दोहे ..

     
  10. Coral

    14/08/2010 at 7:08 पूर्वाह्न

    कल तक जो बोते रहे, काट रहे है लोग ।कर्मों के अनुरूप ही, भुगत रहे हैं भोग …..बहुत सुन्दर!

     
  11. सुज्ञ

    15/08/2010 at 3:23 अपराह्न

    संगीता जी,तृप्ती जी,आभार आपका।

     
  12. संगीता स्वरुप ( गीत )

    16/08/2010 at 3:05 अपराह्न

    मंगलवार 17 अगस्त को आपकी रचना … चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है .कृपया वहाँ आ कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ….आपका इंतज़ार रहेगा ..आपकी अभिव्यक्ति ही हमारी प्रेरणा है … आभार http://charchamanch.blogspot.com/

     
  13. M VERMA

    17/08/2010 at 5:38 अपराह्न

    बहुत सुन्दर

     

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ज्ञानदत्त पाण्डेय का हिन्दी ब्लॉग। मैं गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर रेलवे अफसर।

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