RSS

Tag Archives: भोग

॥भोग-उपभोग॥

हानि न विष से हो सकी, जब तक किया न पान ।
पर क्रोध के उदय मात्र से,  भ्रष्ट हो गया ज्ञान ॥1॥
सुलग रहा  संसार यह,  जैसे वन की आग ।
फ़िर भी मनुज लगा रहा?, इच्छओं के बाग ॥2॥
साझा-निधि जग मानकर, यथा योग्य ही भोग ।
परिग्रह परिमाण कर,  जीवन एक सुयोग ॥3॥
____________________________________________
 
2 टिप्पणियां

Posted by on 27/07/2010 में बिना श्रेणी

 

टैग: , ,

 
गहराना

विचार वेदना की गहराई

॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

दृष्टिकोण

दुनिया और ज़िंदगी के अलग-अलग पहलुओं पर हितेन्द्र अनंत की राय

मल्हार Malhar

पुरातत्व, मुद्राशास्त्र, इतिहास, यात्रा आदि पर Archaeology, Numismatics, History, Travel and so on

मानसिक हलचल

मैं, ज्ञानदत्त पाण्डेय, गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश (भारत) में ग्रामीण जीवन जी रहा हूँ। मुख्य परिचालन प्रबंधक पद से रिटायर रेलवे अफसर। वैसे; ट्रेन के सैलून को छोड़ने के बाद गांव की पगडंडी पर साइकिल से चलने में कठिनाई नहीं हुई। 😊

सुज्ञ

चरित्र विकास

WordPress.com

WordPress.com is the best place for your personal blog or business site.

हिंदीज़ेन : HindiZen

जीवन में सफलता, समृद्धि, संतुष्टि और शांति स्थापित करने के मंत्र और ज्ञान-विज्ञान की जानकारी

WordPress.com News

The latest news on WordPress.com and the WordPress community.