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Tag Archives: गुणानुराग

गुणों को सम्मान

एक व्यक्ति कपडे सिलवाने के उद्देश्य से दर्जी के पास गया। दर्जी अपने काम में व्यस्त था। उसे व्यस्त देखकर वह उसका निरिक्षण करने लगा, उसने देखा सुई जैसी छोटी चीज को सम्हाल कर, वह अपने कॉलर में लगा देता और कैंची को वह अपनें पांव तले दबाकर रखता था।दर्जी दार्शनिक था, उसनें कहा- वैसे तो इस प्रकार रखने का उद्देश्य मात्र यह है कि आवश्यकता होने पर सहज उपल्ब्ध रहेकिन्तु यह वस्तुएँ अपने गुण-स्वभाव के कारण ही उँच-नीच के उपयुक्त स्थान पाती है। सुई जोडने का कार्य करती है, अतः वह कॉलर में स्थान पाती है और कैची काटकर जुदा करने का कार्य करती है, अतः वह पैरो तले स्थान पाती है।

वह सोचने लगा, कितना गूढ़ रहस्य है। सही ही तो है, लोग भी अपने इन्ही गुणो के कारण उपयुक्त महत्व प्राप्त करते है। जो लोग जोडने का कार्य करते है, सम्मान पाते है। और जो तोडने का कार्य करते है, उन्हें अन्ततः अपमान ही मिलता है

जैसे गुण वैसा सम्मान।
कैंची, आरा, दुष्टजन जुरे देत विलगाय !
सुई,सुहागा,संतजन बिछुरे देत मिलाय !!
 

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॥दस्तक॥

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मल्हार Malhar

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मैं, ज्ञानदत्त पाण्डेय, गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश (भारत) में ग्रामीण जीवन जी रहा हूँ। मुख्य परिचालन प्रबंधक पद से रिटायर रेलवे अफसर। वैसे; ट्रेन के सैलून को छोड़ने के बाद गांव की पगडंडी पर साइकिल से चलने में कठिनाई नहीं हुई। 😊

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