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सहन-शक्ति

16 दिसम्बर

बात महात्मा बुद्ध के पूर्व भव की है जब वे जंगली भैंसे की योनि भोग रहे थे। तब भी वे एकदम शान्त प्रकृति के थे। जंगल में एक नटखट बन्दर उनका हमजोली था। उसे महात्मा बुद्ध को तंग करने में बड़ा आनन्द आता। वह कभी उनकी पीठ पर सवार हो जाता तो कभी पूंछ से लटक कर झूलता,  कभी कान में ऊंगली डाल देता तो कभी नथुने में। कई बार गर्दन पर बैठकर दोनों हाथों से सींग पकड़ कर झकझोरता। महात्मा बुद्ध उससे कुछ न कहते।

उनकी सहनशक्ति और वानर की धृष्टता देखकर देवताओं ने उनसे निवेदन किया, “शान्ति के अग्रदूत, इस नटखट बंदर को दंड दीजिये। यह आपको बहुत सताता है और आप चुपचाप सह लेते हैं!”

वह बोले, “मैं इसे सींग से चीर सकता हूं, माथे की टक्कर से पीस सकता हूं, परन्तु में ऐसा नहीं करता, न करुंगा। अपने से बलशाली के अत्याचार को सहने की शक्ति तो सभी जुटा लेते हैं, परन्तु सच्ची सहनशक्ति तो अपने से बलहीन की प्रताड़ना सहन करने में है।”

 

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21 responses to “सहन-शक्ति

  1. ब्लॉग बुलेटिन

    16/12/2012 at 12:34 अपराह्न

    विजय दिवस की हार्दिक बधाइयाँ – ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है … सादर आभार !

     
  2. संगीता स्वरुप ( गीत )

    16/12/2012 at 1:03 अपराह्न

    गहन प्रसंग …

     
  3. देवेन्द्र पाण्डेय

    16/12/2012 at 2:16 अपराह्न

    प्रेरक प्रसंग।

     
  4. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    16/12/2012 at 3:07 अपराह्न

    क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो की तरह सहन-शक्ति भी अपने से कम बलवान व्यक्ति की प्रताडना को हंसकर सहने में है!!बहुत ही प्रेरक प्रसंग!!

     
  5. संजय @ मो सम कौन ?

    16/12/2012 at 3:29 अपराह्न

    जन्मों के संस्कार।यूँ भी जिसके पास क्षमा, दया, सहिष्णुता है वही तो यह दे सकने में सक्षम है, जो पहले ही इन से हीन हैं वो कहाँ से दे सकेंगे?

     
  6. सुज्ञ

    16/12/2012 at 5:43 अपराह्न

    आभार जी,

     
  7. धीरेन्द्र सिंह भदौरिया

    16/12/2012 at 9:09 अपराह्न

    सहन-शक्ति ही महानता है,बहुत प्रेरक प्रस्तुति ,,,,recent post हमको रखवालो ने लूटा

     
  8. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

    16/12/2012 at 9:54 अपराह्न

    क्षमा बड़न को चाहिए … बड़ी शिक्षा है – आभार!

     
  9. प्रवीण पाण्डेय

    16/12/2012 at 9:58 अपराह्न

    सहना भी शक्ति का प्रतीक है।

     
  10. दीर्घतमा

    16/12/2012 at 9:59 अपराह्न

    chhama sobhati us bhujang ko jiske pas garal ho—–!

     
  11. प्रेम सरोवर

    16/12/2012 at 10:57 अपराह्न

    बहुत ही सुंदर। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

     
  12. वाणी गीत

    17/12/2012 at 11:56 पूर्वाह्न

    सहनशक्ति की सही परख !विचारणीय !

     
  13. सतीश सक्सेना

    17/12/2012 at 12:35 अपराह्न

    वाह ….यह सहनशक्ति जुटाना आसान नहीं …मंगल कामनाएं !

     
  14. Madan Mohan Saxena

    17/12/2012 at 12:37 अपराह्न

    सुन्दर प्रस्तुति। सहनशक्ति की सही परख .मंगल कामनाएं !

     
  15. smt. Ajit Gupta

    17/12/2012 at 3:48 अपराह्न

    प्रेरणास्‍पद।

     
  16. Er. Shilpa Mehta : शिल्पा मेहता

    17/12/2012 at 10:07 अपराह्न

    hhhmmm…

     
  17. abeautyful heart

    18/12/2012 at 10:31 अपराह्न

    वाह…सुन्दर प्रेरक प्रसंग…बहुत बहुत बधाई…

     
  18. प्रसन्न वदन चतुर्वेदी

    18/12/2012 at 10:33 अपराह्न

    बेहतरीन प्रेरक प्रसंग…बहुत बहुत बधाई…

     
  19. प्रेम सरोवर

    21/12/2012 at 6:40 पूर्वाह्न

    प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है। धन्यवाद।

     
  20. Ankur Jain

    21/12/2012 at 10:53 अपराह्न

    सुंदर कथा।हर कोई अपना रौब अपने से कमजोर पर ही दिखाता है…

     

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ज्ञानदत्त पाण्डेय का हिन्दी ब्लॉग। मैं यह ब्लॉग लिखने के अलावा गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। रेलवे से ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर्ड अफसर।

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