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जीवन सार्थक कौनसा?

13 जुलाई
प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने तरीके से जीवन को सार्थक बनाना चाहता है। यह बात अलग है कि उसका जो भी तरीका है, उससे जीवन सार्थक होता है या नहीं?
प्रायः बहिर्मुख-मानव भोग-उपभोग की विपुलता में ऐन्द्रियिक विषयों के सेवन में ही मानव-जीवन की सार्थकता देखता है, किन्तु अन्तर्मुख मानव इन भोगोपभोग में जीवन का दुरूपयोग देखता है और उदारता, दान, दया, परोपकार आदि उदात्त भावों के सेवन में जीवन का सदुपयोग अनुभव करता है।
वस्तुतः मनुष्य जीवन की सार्थकता अपने जीवन को सु-संस्कृत, परिष्कृत, विशुद्ध और परिमार्जित करने में है। इन्ही प्रयत्नो की परम्परा में मन वचन और काया से ज्ञान दर्शन चरित्र की आराधना ही प्रमुख है। मानव जीवन की सार्थकता-सफलता जीवन मूल्यों को उन्नत और उत्तम बनाने में है।

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8 टिप्पणियाँ

Posted by on 13/07/2011 in बिना श्रेणी

 

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8 responses to “जीवन सार्थक कौनसा?

  1. रश्मि प्रभा...

    13/07/2011 at 6:33 अपराह्न

    beshak …

     
  2. अरुण चन्द्र रॉय

    13/07/2011 at 7:58 अपराह्न

    bahut sundar vichar

     
  3. Rakesh Kumar

    13/07/2011 at 11:13 अपराह्न

    आपके सुन्दर विचारों से सद्-प्रेरणा का संचार होता है.बहुत बहुत आभार.

     
  4. सदा

    14/07/2011 at 12:09 अपराह्न

    बिल्‍कुल सही कहा है आपने ।

     
  5. रंजना

    14/07/2011 at 5:08 अपराह्न

    महत सद्विचार सुप्रसार हेतु कोटि कोटि आभार…

     
  6. shilpa mehta

    14/07/2011 at 5:51 अपराह्न

    जीवन सार्थक उसका है – जो इस जद्दोजहद से निकाल सके कि मैं अपने लिए यह पा लूं, वह बना लूं | यदि आपके पास सब कुछ भी है और "कुछ और " मिल जाए इस अभिलाषा में आप भाग रहे हैं – तो आपका जीवन सार्थक नहीं हुआ है अब तक | यदि आपके पास इतना है कि आप अपने परिवार के साथ सर्वाइव कर सकते हैं, और आप के पास मानसिक शान्ति है – कुछ पाने की अंधी होड़ में आप भागे नहीं जा रहे हैं – यदि आपके पास यह सच्चाई के साथ कहने की काबिलियत है कि "ईश्वर मेरे साथ हैं, मैं सही राह पर हूँ – और यह मेरे लिए काफी है " – तो आपका जीवन सार्थक है |

     
  7. सुज्ञ

    14/07/2011 at 9:42 अपराह्न

    शिल्पा जी,स्वागत है आपका सुबोध पर!!आपका कहना सही है। तृष्णा से दूर रहना और संतोष गुण धारण करनें में जीवन की सार्थकता है।

     
  8. मनोज भारती

    15/07/2011 at 1:53 अपराह्न

    सार्थक जीवन पर सार्थक टिप्पणी !

     

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ज्ञानदत्त पाण्डेय का हिन्दी ब्लॉग। मैं गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर रेलवे अफसर।

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