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आत्मश्रद्धा से भर जाऊँ, प्रभुवर ऐसी भक्ति दो।

05 अप्रैल

(चारों और फ़ैली आशा, निराशा, विषाद, श्रद्धा-अश्रद्धा के बीच एक जीवट अभिव्यक्ति)
 

आत्मश्रद्धा से भर जाऊँ, प्रभुवर ऐसी भक्ति दो।
समभावों से कष्ट सहूँ बस, मुझ में ऐसी शक्ति दो॥
कईं जन्मों के कृतकर्म ही, आज उदय में आये है।
कष्टो का कुछ पार नहीं, मुझ पर सारे मंडराए है।
डिगे न मन मेरा समता से, चरणो में अनुरक्ति दो।
समभावों से कष्ट सहूँ बस, मुझ में ऐसी शक्ति दो॥
कायिक दर्द भले बढ जाय, किन्तु मुझ में क्षोभ न हो।
रोम रोम पीड़ित हो मेरा, किंचित मन विक्षोभ न हो।
दीन-भाव नहीं आवे मन में, ऐसी शुभ अभिव्यक्ति दो।
समभावों से कष्ट सहूँ बस, मुझ में ऐसी शक्ति दो॥
दुरूह वेदना भले सताए, जीवट अपना ना छोडूँ।
जीवन की अन्तिम सांसो तक, अपनी समता ना छोडूँ।
रोने से ना कष्ट मिटे, यह पावन चिंतन शक्ति दो।
समभावों से कष्ट सहूँ बस, मुझ में ऐसी शक्ति दो॥

अर्चना चावजी की मधुर आवाज में सुनें यह प्रार्थना…

 

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31 responses to “आत्मश्रद्धा से भर जाऊँ, प्रभुवर ऐसी भक्ति दो।

  1. सञ्जय झा

    05/04/2011 at 5:59 अपराह्न

    shradha to hamari aap par hai hi……aise hi 'suman' vachan pushpit-pallavit karte rahen…to bhakti bhi karne lag jaoonga……..pranam.

     
  2. सतीश सक्सेना

    05/04/2011 at 6:07 अपराह्न

    बहुत प्यारी याचना है करुणानिधान से …हार्दिक शुभकामनाये !

     
  3. आलोक मोहन

    05/04/2011 at 7:08 अपराह्न

    हे परमात्मा सबको शक्ति दे बहुत ही भावपूर्ण कविता

     
  4. विशाल

    05/04/2011 at 7:22 अपराह्न

    बहुत उम्दा,सुज्ञ जी.दुरूह वेदना भले सताए, जीवट अपना ना छोडूँ।जीवन की अन्तिम सांसो तक, अपनी समता ना छोडूँ।रोने से ना कष्ट मिटे, यह पावन चिंतन शक्ति दो।समभावों से कष्ट सहूँ बस, मुझ में ऐसी शक्ति दो.समता जिसने पा ली,उसने ईश्वर को पा लिया.

     
  5. डॉ॰ मोनिका शर्मा

    05/04/2011 at 8:49 अपराह्न

    रोने से ना कष्ट मिटे, यह पावन चिंतन शक्ति दो।समभावों से कष्ट सहूँ बस, मुझ में ऐसी शक्ति दो॥बहुत ही गहन विचार लिए हैं यह शब्द… सुंदर सच्चे अर्थपूर्ण भाव ….

     
  6. VICHAAR SHOONYA

    05/04/2011 at 10:30 अपराह्न

    प्रार्थना के भाव बहुत सुन्दर हैं.

     
  7. Deepak Saini

    05/04/2011 at 10:41 अपराह्न

    आपकी इस तरह की अभिव्यक्ति हमारी श्रद्धा को और गहन कर देती है सुन्दर रचना शुभकामनाये

     
  8. भारतीय नागरिक - Indian Citizen

    05/04/2011 at 10:47 अपराह्न

    बहुत सुन्दर मंशा व्यक्त की है. हर व्यक्ति की यही कामना होना चाहिये.

     
  9. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

    06/04/2011 at 4:48 पूर्वाह्न

    अनुकरणीय प्रार्थना!

     
  10. Rahul Singh

    06/04/2011 at 9:13 पूर्वाह्न

    आपकी प्रार्थना, हम सबकी भी.

     
  11. प्रतुल वशिष्ठ

    06/04/2011 at 9:15 पूर्वाह्न

    वंदना के इन स्वरों में मौन स्वर मेरा मिला लो. हाथ जोड़े मैं खड़ा हूँ.

     
  12. Global Agrawal

    06/04/2011 at 1:05 अपराह्न

    मैं भी हूँ यहाँ पर 🙂 मुझे भी प्रार्थना में शामिल किया जाए 🙂

     
  13. Global Agrawal

    06/04/2011 at 1:06 अपराह्न

    मैं कोई मस्ती नहीं करूँगा , शोर भी नहीं मचाऊंगा 🙂

     
  14. Global Agrawal

    06/04/2011 at 1:32 अपराह्न

    लेकिन सलाह देने से बाज नहीं आऊंगा 🙂 @सुज्ञ जीदूसरे ब्लोग्स[?] पर आपकी टिप्पणियों के चक्कर में पूरे के पूरे लेख[?] पढने पड़ जाते हैं 🙂 क्योंकि आपकी टिप्पणी के बाद हर लेख[?] की कीमत बढ़ जाती है .. आप समझ रहे हैं ना ? :)"आपकी टिप्पणी के बाद लेख[?] की कीमत बढ़ जाती है" 🙂

     
  15. Suman

    06/04/2011 at 1:53 अपराह्न

    bahut sunder rachna ….pahali baar aana huva aapke blog par…

     
  16. सुज्ञ

    06/04/2011 at 3:10 अपराह्न

    सुमन जी,स्वागत है आपका!!

     
  17. सुज्ञ

    06/04/2011 at 3:16 अपराह्न

    ग्लोबल जी,आप ऐसा मानते है,हमारा सौभाग्य है। लोगों तक प्रेम सौहार्द से सार्थक बात पहूँच जाय। बस

     
  18. सुज्ञ

    06/04/2011 at 3:19 अपराह्न

    लोग स्वेच्छा इस प्रार्थना सभा में सम्मलित हों,इसलिये हमने संकेत टिप्पणी आमंत्रण औपचारिकता नहीं की। 🙂

     
  19. ZEAL

    06/04/2011 at 5:29 अपराह्न

    एक बहुत ही सुन्दर प्रार्थना है । जरूरी है कि हर पाठक , ब्लॉगर , टिप्पणीकार इस प्रार्थना को अपनी प्रतिदिन की प्रार्थना में शामिल कर ले। तभी जगत का कल्याण संभव है । वैसे सुज्ञ जी , आपमें तो ये सारे गुण पहले से ही विद्यमान हैं , फिर भी प्रार्थना का नियम बनाए रखिये। हम भी Global जी के साथ ही इस प्रार्थना को दोहरा रहे हैं आपके साथ ।

     
  20. सुज्ञ

    06/04/2011 at 5:45 अपराह्न

    दिव्या जी,अच्छे विचारों का तो बार बार मनन जरूरी है। प्रतिदिन वही प्रार्थनाएँ, हमारे मन में समता भाव को बनाए रखती है।बेशक आप अपने मनोबल को पोषण दे सकती है।

     
  21. rashmi ravija

    06/04/2011 at 9:15 अपराह्न

    प्रार्थना का हर शब्द सुन्दर भाव से सजा हुआ है..

     
  22. कुमार राधारमण

    07/04/2011 at 2:29 अपराह्न

    उच्चतर ऊर्जा की ओर बढ़ते कदम।

     
  23. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    08/04/2011 at 12:58 पूर्वाह्न

    सुज्ञ जी,कायिक वेदना के उपरांत भी क्षोभ नहीं है इन दिनों मेरे मन में.. आपकी रचना ने तो यदि कोई क्षोभ रहा भी हो तो उसे भी मिटा दिया है!!

     
  24. रश्मि प्रभा...

    08/04/2011 at 8:45 पूर्वाह्न

    कायिक दर्द भले बढ जाय, किन्तु मुझ में क्षोभ न हो।रोम रोम पीड़ित हो मेरा, किंचित मन विक्षोभ न हो।दीन-भाव नहीं आवे मन में, ऐसी शुभ अभिव्यक्ति दो।समभावों से कष्ट सहूँ बस, मुझ में ऐसी शक्ति दो॥akinchan bhaw se ki gai prarthna

     
  25. मीनाक्षी

    08/04/2011 at 12:14 अपराह्न

    दीन-भाव नहीं आवे मन में, ऐसी शुभ अभिव्यक्ति दो।समभावों से कष्ट सहूँ बस, मुझ में ऐसी शक्ति दो॥प्रार्थना को बार बार दोहराने से अद्भुत उर्जा मिलती है..उसी उर्जा को लेकर जा रहे हैं…आभार्

     
  26. ज्ञानचंद मर्मज्ञ

    08/04/2011 at 2:09 अपराह्न

    श्रद्धा, प्रेम और भक्ति से भरी हृदयग्राही पंक्तियाँ !

     
  27. Kunwar Kusumesh

    10/04/2011 at 7:37 अपराह्न

    बड़ी खूबसूरत आराधना के ज़रिये प्रभु को पुकारा है आपने,वो ज़रूर सुनेगा आपकी.

     
  28. अमित शर्मा---Amit Sharma

    12/04/2011 at 10:58 पूर्वाह्न

    त्रिभुवन जननायक मर्यादा पुरुषोतम अखिल ब्रह्मांड चूडामणि श्री राघवेन्द्र सरकारके जन्मदिन की हार्दिक बधाई हो !!

     
  29. देवेन्द्र पाण्डेय

    12/04/2011 at 5:46 अपराह्न

    समभावों से कष्ट सहूँ बस, मुझ में ऐसी शक्ति दो॥..बहुत सुंदर। ..समभाव की शक्ति प्राप्त करने के लिए कई जन्म भले लग जाय पर प्रार्थना करते रहना चाहिए। शायद किसी जन्म में प्रभु सुन लें।

     
  30. विरेन्द्र सिंह चौहान

    12/04/2011 at 9:25 अपराह्न

    इस प्रार्थना में मुझे भी शामिल मानिए. आपको रामनवमी की भी कोटि कोटि शुभकामनाएँ.

     

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