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विद्या

12 मार्च

मातेव रक्षति पितेव हिते वियुकंते,

कान्तेव चाभिर्मयत्यपनिय खेदं ।

                  लक्ष्मीस्तनोति वितनोति च दिक्षु  कीर्ति,

                  कि किन्न साध्यति कल्पलतेव विद्या ॥

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माता की भांति रक्षा करती है, पिता की तरह हित में प्रवृत रहती है, पत्नी के समान खेद हरण कर आनंद देती है, लक्ष्मी का उपार्जन करवाती है, संसार में कीर्ति प्रदान करती है। सदविद्या वास्तव में कल्पलता के समान है।

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1 टिप्पणी

Posted by on 12/03/2011 में बिना श्रेणी

 

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One response to “विद्या

  1. ZEAL

    14/03/2011 at 12:02 अपराह्न

    सदविद्या वास्तव में कल्पलता के समान है।So true!.

     

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