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कौन सी सुबह जलाओगे तमन्नाओं का चराग़………?

29 जनवरी
‘वक्त’ पर कुछ संकलन से………
जब वक्त ही न रहा पास तो फिर क्या होगा?
लुट गई दौलते अहसास तो फिर क्या होगा?
कौन सी सुबह जलाओगे तमन्नाओं का चराग़?
शाम से ही टूट गई आस तो फिर क्या होगा?
सांस लेना ही केवल जिन्दगानी नहीं है।
उस बीस साल की उम्र का नाम जवानी नहीं है।
ज्योत बन जीना घड़ी भर का भी सार्थक,
जल के दे उजाला उस दीप का सानी नहीं है।
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6 responses to “कौन सी सुबह जलाओगे तमन्नाओं का चराग़………?

  1. रंजना

    29/01/2011 at 5:29 अपराह्न

    ज्योत बन जीना घड़ी भर का भी सार्थक,जल के दे उजाला उस दीप का सानी नहीं है।ओह…क्या बात कह दी आपने…अद्वितीय रचना…वाह !!!

     
  2. रश्मि प्रभा...

    29/01/2011 at 7:40 अपराह्न

    जब वक्त ही न रहा पास तो फिर क्या होगा?लुट गई दौलते अहसास तो फिर क्या होगा?कौन सी सुबह जलाओगे तमन्नाओं का चराग़?शाम से ही टूट गई आस तो फिर क्या होगा?vyastataaon ke bich aai hun yahan aur mann halka ho gaya

     
  3. संजय भास्कर

    29/01/2011 at 11:29 अपराह्न

    सुज्ञ जीआपने तो खुश कर दिया

     
  4. bhavnayen

    30/01/2011 at 11:28 पूर्वाह्न

    ek umda rachna

     
  5. अमित शर्मा

    30/01/2011 at 12:27 अपराह्न

    बेहद उम्दा भवभिव्यक्ती ……………

     
  6. हल्ला बोल

    29/04/2011 at 12:35 पूर्वाह्न

    ब्लॉगजगत में पहली बार एक ऐसा "साझा मंच" जो हिन्दुओ को निष्ठापूर्वक अपने धर्म को पालन करने की प्रेरणा देता है. बाबर और लादेन के समर्थक मुसलमानों का बहिष्कार करता है, धर्मनिरपेक्ष {कायर } हिन्दुओ के अन्दर मर चुके हिंदुत्व को आवाज़ देकर जगाना चाहता है. जो भगवान राम का आदर्श मानता है तो श्री कृष्ण का सुदर्शन चक्र भी उठा सकता है.इस ब्लॉग के लेखक बनने के लिए. हमें इ-मेल करें.हमारा पता है…. hindukiawaz@gmail.comसमय मिले तो इस ब्लॉग को देखकर अपने विचार अवश्य देदेशभक्त हिन्दू ब्लोगरो का पहला साझा मंच – हल्ला बोल

     

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ज्ञानदत्त पाण्डेय का हिन्दी ब्लॉग। मैं गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर रेलवे अफसर।

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