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जब वक्त ही न रहा पास तो फिर क्या होगा?

25 जनवरी
‘वक्त’ पर कुछ संकलन से………
जब वक्त ही न रहा पास तो फिर क्या होगा?
लुट गई दौलते अहसास तो फिर क्या होगा?
कौन सी सुबह जलाओगे तमन्नाओं का चराग़?
शाम से ही टूट गई आस तो फिर क्या होगा?
सांस लेना ही केवल जिन्दगानी नहीं है।
उस बीस साल की उम्र का नाम जवानी नहीं है।
ज्योत बन जीना घड़ी भर का भी सार्थक,
जल के दे उजाला उस दीप का सानी नहीं है।
 
19 टिप्पणियाँ

Posted by on 25/01/2011 in बिना श्रेणी

 

टैग: ,

19 responses to “जब वक्त ही न रहा पास तो फिर क्या होगा?

  1. Rahul Singh

    25/01/2011 at 7:58 पूर्वाह्न

    सजग करती पंक्तियां. ('धड़ी' को 'घड़ी' सुधार करने पर विचार कर लें)

     
  2. सतीश सक्सेना

    25/01/2011 at 8:52 पूर्वाह्न

    सही चेतावनी सुज्ञ जी ! शुभकामनायें !

     
  3. भारतीय नागरिक - Indian Citizen

    25/01/2011 at 9:33 पूर्वाह्न

    चेताने के लिय्रे धन्यवाद..

     
  4. Kunwar Kusumesh

    25/01/2011 at 9:36 पूर्वाह्न

    ज्योत बन जीना धड़ी भर का भी सार्थक,जल के दे उजाला उस दीप का सानी नहीं है.वाह वाह .बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

     
  5. sanjay jha

    25/01/2011 at 10:58 पूर्वाह्न

    chintaniya prashn…..pranam.

     
  6. ehsas

    25/01/2011 at 11:03 पूर्वाह्न

    बिल्कुल सही सोच। आभार।

     
  7. deepak saini

    25/01/2011 at 12:01 अपराह्न

    वाह, क्या बात कही हैबहुत सुन्दर पंक्तियाँ

     
  8. प्रतुल वशिष्ठ

    25/01/2011 at 12:28 अपराह्न

    .वाह भाई !उचित उपदेश को कहती कमाल की कवितायी. .

     
  9. वन्दना

    25/01/2011 at 1:27 अपराह्न

    वाह ! क्या बात कही है…………बहुत सुन्दर्।

     
  10. सम्वेदना के स्वर

    25/01/2011 at 6:04 अपराह्न

    सही बात है! समय चूकि पुनि का पछतानि!!

     
  11. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    26/01/2011 at 12:23 पूर्वाह्न

    सुज्ञ जी! जब यहाँ आता हूँ, ख़ाली हाथ नहीं जाता हूँ..

     
  12. उपेन्द्र ' उपेन '

    26/01/2011 at 12:58 पूर्वाह्न

    कौन सी सुबह जलाओगे तमन्नाओं का चराग़?शाम से ही टूट गई आस तो फिर क्या होगा?bahut hi bavpurn pratuti…….

     
  13. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

    26/01/2011 at 7:02 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर!

     
  14. ZEAL

    26/01/2011 at 10:25 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर विचार !

     
  15. वन्दना महतो !

    26/01/2011 at 10:39 पूर्वाह्न

    ज्योत बन जीना घड़ी भर का भी सार्थक,जल के दे उजाला उस दीप का सानी नहीं है———— कितनी गहरी बात कह दी आपने!

     
  16. Coral

    26/01/2011 at 1:37 अपराह्न

    बहुत सुन्दर रचना है आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं!

     
  17. Kailash C Sharma

    26/01/2011 at 2:51 अपराह्न

    जब वक्त ही न रहा पास तो फिर क्या होगा?बहुत सही कहा..सभी वक्त के गुलाम हैं..गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनायें !

     
  18. वर्ज्य नारी स्वर

    26/01/2011 at 9:03 अपराह्न

    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ…..बहुत सुन्दर विचार……बहुत सुन्दरआभार…………….

     
  19. ana

    26/01/2011 at 9:29 अपराह्न

    बहुत सुन्दर रचना……….. गहरी बात…. वाह

     

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ज्ञानदत्त पाण्डेय का हिन्दी ब्लॉग। मैं यह ब्लॉग लिखने के अलावा गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। रेलवे से ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर्ड अफसर।

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