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नर-वीर

12 जनवरी

चोट खाकर रो पडे वो आदमी नादान है।

गिरते हुए गैर पर हँसना बड़ा आसान है।
थाम ले जो हाथ गिरते आदमी का,
बस आदमी होता वही इन्सान है॥
तन को निर्मल बना दे वह नीर होता है।
शान्ति से सहन करे वह धीर होता है।
क्रोध करने वाले में छिपी है कायरता,
समभावी क्षमाशील ही नर-वीर होता है॥
________________________________________
 
27 टिप्पणियाँ

Posted by on 12/01/2011 in बिना श्रेणी

 

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27 responses to “नर-वीर

  1. Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार

    13/01/2011 at 12:03 पूर्वाह्न

    प्रिय बंधुवर सुज्ञ जी सस्नेहाभिवादन ! कैसे हैं ? आशा है, सपरिवार स्वस्थ-सानन्द हैं ।आपके यहां आ कर पढ़ कर चला जाता हूं , यह सोच कर कि वापस आ'कर विस्तार से लिखूंगा । … लेकिन अवसर निकल जाता है ।आपकी हर पोस्ट में मानवता की भावनाओं से ओत-प्रोत समाज के लिए उपयोगी और चरित्र-निर्माण की प्रेरणा प्रदान करने वाली सामग्री होती है । … और इसलिए आप बधाई एवम् साधुवाद के पात्र हैं । ~*~नव वर्ष २०११ के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं !~*~ शुभकामनाओं सहित- राजेन्द्र स्वर्णकार

     
  2. shekhar suman

    13/01/2011 at 12:54 पूर्वाह्न

    बस एक ही शब्द है कहने के लिए…लाजवाब…..

     
  3. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    13/01/2011 at 12:58 पूर्वाह्न

    सुज्ञ जी! बहुत ही सुंदर परिभाषा!!

     
  4. भारतीय नागरिक - Indian Citizen

    13/01/2011 at 1:38 पूर्वाह्न

    सुन्दर.

     
  5. Mithilesh dubey

    13/01/2011 at 9:00 पूर्वाह्न

    बहुत ही गजब ।

     
  6. Kunwar Kusumesh

    13/01/2011 at 9:40 पूर्वाह्न

    जीवनोपयोगी सुन्दर रचनाएँ.

     
  7. Rahul Singh

    13/01/2011 at 10:07 पूर्वाह्न

    रचनात्‍मक अर्थ और परिभाषा.

     
  8. सतीश सक्सेना

    13/01/2011 at 10:40 पूर्वाह्न

    बढ़िया सद्वचन सुज्ञ जी ! शुभकामनायें

     
  9. anshumala

    13/01/2011 at 10:41 पूर्वाह्न

    शान्ति से सहन करे वह धीर होता है।क्रोध करने वाले में छिपी है कायरता,इन दो लाईनों से थोडा सहमत नहीं हु क्योकि ये बात हर बार हो ये जरुरी नहीं है | मतलब हर बार सहना धीरज नहीं होता है वो कमजोरी और कायरता भी हो सकती है और हर बार सहन करना अत्याचार करने वाले को बढ़ावा भी देता है | और हमें तो भ्रष्टाचारियो, अत्याचारियों नेताओ कइयो उनके कम के कारण क्रोध आता है तो क्या वो कायरता है |

     
  10. सुज्ञ

    13/01/2011 at 11:25 पूर्वाह्न

    अंशुमाला जी,प्रथम दृष्टि में यही सही लगता है। किन्तु हम गहरा चिंतन करें तो पाएंगे……वाकई वहाँ कायरता छिपी है।भ्रष्टाचारियो, अत्याचारियों पर मात्र क्रोध भ्रष्टाचार अनाचार का इलाज़ नहीं है। सार्थक प्रयास और सुनियोजित जाग्रति ही इन्हे न्यूनाधिक दूर करने का इलाज है। ऐसा पुरूषार्थ हम कर नही सकते इसलिये क्रोध कर जिम्मेदारियों से मुक्त हो लेते है।अत्याचारी के समक्ष क्रोध दर्शाने पर, यदि अत्याचारी कमजोर हुआ तब तो सहम जायेगा। अन्यथा क्रोध का बदला क्रोध की एक श्रंखला निर्मित होगी। समस्या स्थाई हल से दूर हो जायेगी।हमें कमजोर न मान लिया जाय,इस डर मिश्रित मनस्थिति में, अनिर्णायक क्रोध, कायरता नहीं तो क्या है।सार्थक प्रश्न के लिये आभार!!

     
  11. sada

    13/01/2011 at 12:34 अपराह्न

    बहुत ही सुन्‍दर एवं सार्थक संदेश …।

     
  12. ajit gupta

    13/01/2011 at 1:18 अपराह्न

    प्रेरक मुक्‍तक देने के लिए बधाई।

     
  13. deepak saini

    13/01/2011 at 1:46 अपराह्न

    अनमोल वचन

     
  14. Mukesh Kumar Sinha

    13/01/2011 at 3:14 अपराह्न

    Ek insaan hi insaan ko samajh sakta hai ………hai na !!…anmol baten kahte ho sir..:)

     
  15. राज भाटिय़ा

    13/01/2011 at 3:52 अपराह्न

    वाह जी बहुत अनमोल वचन कहे आप ने धन्यवाद

     
  16. सुशील बाकलीवाल

    13/01/2011 at 4:33 अपराह्न

    श्री सुज्ञजी,अनमोल विचारों का खजाना आपके पास हमेशा ही दिखाई देता है ।नजरिया परिवार में शामिल होने पर आपको बहुत-बहुत धन्यवाद… आभार…

     
  17. sanjay jha

    13/01/2011 at 5:02 अपराह्न

    iske bhi asar hote hain …. dhire dhire.pranam.

     
  18. कविता रावत

    13/01/2011 at 6:08 अपराह्न

    प्रेरक प्रस्तुति के लिए बधाई।

     
  19. ज़ाकिर अली ‘रजनीश’

    13/01/2011 at 6:34 अपराह्न

    आपके ब्‍लॉग पर सुंदर सुंदर बातें पढने को मिलती हैं, अच्‍छा लगता है।———बोलने वाले पत्‍थर। सांपों को दुध पिलाना पुण्‍य का काम है?

     
  20. Dimple Maheshwari

    13/01/2011 at 6:47 अपराह्न

    जय श्री कृष्ण…आप बहुत अच्छा लिखतें हैं…वाकई…. आशा हैं आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा….!!

     
  21. विरेन्द्र सिंह चौहान

    13/01/2011 at 7:56 अपराह्न

    बहुत ख़ूब लिखा है। आपका ब्लॉग हर किसी के पढ़ने लायक़ है। आपको इन पंक्तियों के लिए तथा साथ में मकर संक्रांति के अवसर पर शुभकामनाएँ।

     
  22. anshumala

    13/01/2011 at 10:18 अपराह्न

    सुज्ञ जी धन्यवाद, जो आप मेरे इन विचारो को सकरात्मक रूप में लेते है नहीं तो लोगों के ऐसे विचार अपनी आलोचना लगने लगती है | नेताओ पर क्रोध आने पर क्या करे ज्यादातर तो हम उनका कुछ कर ही नहीं पाते है कुछ करने के लिए पांच साल इंतजार कर लेते है |

     
  23. सुज्ञ

    13/01/2011 at 10:41 अपराह्न

    अंशुमाला जी,यकिन मानिये संयत रहने और सौजन्यता से विचार रखने के लिये मुझे भी श्रम करना पडता है। उपयुक्त शब्द चयन,और स्पष्ठ संदेश के लिये वाक्य नियोजन (गढना)।आपकी इस टिप्पणी से मेरे श्रम को पुरस्कार मिल गया।

     
  24. उपेन्द्र ' उपेन '

    13/01/2011 at 11:46 अपराह्न

    बहुत ही सुन्‍दर एवं अनमोल वचन

     
  25. डॉ॰ मोनिका शर्मा

    14/01/2011 at 3:28 पूर्वाह्न

    सुंदर सधे शब्दों की प्रेरणादायी अभिव्यक्ति…..

     
  26. चैतन्य शर्मा

    14/01/2011 at 6:00 पूर्वाह्न

    सक्रांति …लोहड़ी और पोंगल….हमारे प्यारे-प्यारे त्योंहारों की शुभकामनायें……सादर

     
  27. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

    01/10/2012 at 1:02 पूर्वाह्न

    सुन्दर शिक्षा समेटे इस खूबसूरत कविता के लिये आपका आभार सुज्ञ जी!

     

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