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जीवन के 50 वर्ष मैने बालक अवस्था में ही खो दिए

04 दिसम्बर

ज मेरा चिंतन दिवस है। निश्चित ही बहुमूल्य मनुष्य जीवन पाना अतिदुर्लभ है। पता नहीं कितने ही शुभकर्मों के पश्चात यह मनुष्यायु प्राप्त होती है। कठिन शुभकर्मों से उपार्जित इस प्रतिफल को मुझे वेस्ट करना है या पुनः उत्थान विकास के लिये इनवेस्ट करना है।

क्या मेरा उद्देश्य निरंतर विकास नहीं होना चाहिए? यदि साधना विकास है तो साध्य क्या है? चरम परिणिति क्या है। क्या है जो मुझे पाना चाहिए? यदि लक्ष्य निर्धारित हो जाय तो मै उस और सामर्थ्यानुसार गति कर पाऊँ।
वस्तुतः मै परम् सुख चाहता हूँ, ऐसा सुख जो स्थाई रहे, जिसके बाद पुनः दुख न आए। अनंत सुख जहाँ सुख-दुख का भेद ही समाप्त हो जाए। क्षणिक सुखों की तरह नहीं कि आए और जाए। वो सुख भी नहीं, जिसे इन सांसारिक सुखों से तुलना कर परिभाषित किया जाय। इन भौतिक सुखो के समान प्रलोभन दिया जाय अथवा लॉलीपॉप की तरह दूर से दर्शाया जाय।
क्या मैं किसी ‘जजमेंट डे’ के भरोसे जिऊँ, जहाँ अच्छे या बुरे कर्म में भेद तय करने का अवसर ही नहीं मिलेगा? सीधी ही सजा मुक्कर्र हो जायेगी।और मेरे पास अपने कर्म में सुधार, परिमार्जन का समय ही नहीं होगा? नहीं अब तो मेरा हर पल आखरत होना चाहिए। मुझे हर क्षण शुभ कर्म और सार्थक गुण अपनाने चाहिए बिना किसी भय या संशय के। मेरा विवेक हर पल जाग्रत रहना चाहिए। चिंतन मनन मेरे गवाह रहने चाहिए। मेरे विचारों का क्षण क्षण, प्रतिलेखन, समीक्षा और शुद्धिकरण अनवरत जारी रहना चाहिए। क्षण मात्र का प्रमाद किए बिना।
जीवन के 50 वर्ष मैने बालक अवस्था में ही खो दिए। कब आयेगी मुझ में पुख्तता? पुरूषार्थ की इच्छाएँ तो बहुत है पर इस मार्ग पर इतनी बाधाएँ क्यों? मनोरथ तो मात्र तीन है…… निस्पृह, संयम और समाधी!!
आज मेरा जन्मदिन है। यही चिंतन चल रहा है। मुझे मनुष्य जन्म क्यों मिला? क्या है मेरा प्रयोजन?
मेरे आत्मोत्थान में मददगार उदगार देकर, मेरे प्रेरकबल बनें। मुझे प्रेरणा व प्रोत्साहन दें……।
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73 responses to “जीवन के 50 वर्ष मैने बालक अवस्था में ही खो दिए

  1. एस.एम.मासूम

    04/12/2010 at 12:50 पूर्वाह्न

    मित्र सुज्ञ जी यह मेरा सौभाग्य है की आज आप के जन्मदिन की मुबारकबाद ४/१२/२०१०, १२: १८ मिनट पे दे रहा हूँ.आप को जन्म दिन की बहुत बहुत मुबारकबाद . आप का ज्ञान और बढे और हम सब को उस ज्ञान से सीखने को मिले.शुभकामनाओं के साथ.स.म.मासूम अमन का पैग़ाम

     
  2. भारतीय नागरिक - Indian Citizen

    04/12/2010 at 12:56 पूर्वाह्न

    शुभकामनायें और बधाई…

     
  3. Archana

    04/12/2010 at 2:46 पूर्वाह्न

    शुभकामनाएं…….हर किसी का कार्यस्थल पूर्व निर्धारित है उसे जो भी कार्य मिला है हर अवस्था में उसे पूर्ण मनोयोग से पूरा करना ही हमारी जिम्मेदारी है ….जो हो चुका अच्छा हुआ,जो हो रहा है अच्छा हो रहा है, जो होगा अच्छा होगा ….

     
  4. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

    04/12/2010 at 6:40 पूर्वाह्न

    शुभकामनायें! जो बात हमारे हाथ में नहीं है उसके बारे में सोचना क्या – जो अपने बस में है वह सब करने का प्रयास होना चाहिये।

     
  5. Prarthana gupta

    04/12/2010 at 8:10 पूर्वाह्न

    congrates!!!!!!!!!!!!!!this is the best way to live life……

     
  6. अशोक मिश्र

    04/12/2010 at 8:36 पूर्वाह्न

    शुभकामनायें और बधाई…

     
  7. डॉ॰ मोनिका शर्मा

    04/12/2010 at 9:05 पूर्वाह्न

    जन्मदिन की शुभकामनायें ….. आपका सतत चिंतनशील और कर्मशील बने रहें ….. यही प्रार्थना है ईश्वर से….

     
  8. Rahul Singh

    04/12/2010 at 9:56 पूर्वाह्न

    जीवन उल्‍लासमय प्रतिपल, बरसों-बरस बना रहे.

     
  9. ajit gupta

    04/12/2010 at 10:20 पूर्वाह्न

    आपको जन्‍मदिन की बधाई। आज आपने अपने जीवन के दो बहुमूल्‍य आश्रम पूर्ण कर लिए है और तीसरे आश्रम – संयास आश्रम में आप प्रवेश ले रहे हैं। यह आश्रम समाज के लिए है। आपने जितना समाज से पाया है अब समय आ गया है कि उसे लौटाएं। यदि हमने स्‍वयं को पारिवारिक मोह से परे हटकर अब समाज कार्यों में अपने जीवन को लगा लिया है तो समझिए आपका जीवन सार्थक है।

     
  10. मनोज कुमार

    04/12/2010 at 11:13 पूर्वाह्न

    जन्म दिन की शुभकामनाएं और बधाई। आपके जन्‍मदिन से 365 दिन की एक नई यात्रा फिर से शुरू होती है । आपकी ये यात्रा मंगलमय और खुशियों से भरी हो । और आप एक बार फिर से बचपाना जिएं।

     
  11. अमित शर्मा

    04/12/2010 at 11:51 पूर्वाह्न

    आपको जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई ! ईश्वर आपको सफल जीवन प्रदान करें .बाकि आपसे निवेदन है की आजीवन बालक ही बने रहिएगा, बालक बने रहने तक ही व्यक्ति निश्चल रहता है बड़ा होते ही तो बुराई दल-दल में ही समाना है .

     
  12. anshumala

    04/12/2010 at 12:19 अपराह्न

    सुज्ञ जी आप को जन्मदिन की शुभकामनाये | जैसा की अजित जी ने कहा है की अब आप सन्यास आश्रम में प्रवेश करे जा रहे है तो जो पुरे बाल्य अवस्था में जो सिखा है उसे समाज कार्य में आजमाना शुरू कर दीजिये उसके बाद जो ख़ुशी मिलेगी वो क्षणिक नहीं होगी सच्ची होगी कभी ना जाने वाली |

     
  13. अरविन्द जांगिड

    04/12/2010 at 2:46 अपराह्न

    जन्म दिन कि हार्दिक बधाइयों के साथ ईश्वर से प्रार्थना है कि आपकी चिन्तनशीलता यूँ ही चलती रहे…साधुवाद.

     
  14. rashmi ravija

    04/12/2010 at 3:51 अपराह्न

    जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं…..बालक अवस्था वाला एक दिन और जी लें….जी भर कर एन्जॉय करें..चिंतन कल से शुरू करें 🙂

     
  15. सुशील बाकलीवास

    04/12/2010 at 4:26 अपराह्न

    आज तो आप सिर्फ जन्मदिन की शुभकामनाएँ ही स्वीकार कीजिये । चिन्तन-मनन तो चलता आरहा है और चलता ही रहेगा । Happy Birthday To You…

     
  16. वन्दना

    04/12/2010 at 6:03 अपराह्न

    जन्मदिन की शुभकामनायें .ये चिन्तन हमेशा बना रहे।

     
  17. सुज्ञ

    04/12/2010 at 6:03 अपराह्न

    एस.एम.मासूम साहब,शुभकामनाओं के लिये आभार।ज्ञानार्जन को ही ध्येय बनाया है।भारतीय नागरिक ज़ी,शुभकामनाओं के लिये आभार।अर्चना जी,शुभकामनाओं के लिये आभार।पूर्ण मनोयोग से जिम्मेदारीयाँ पूरी कर पाउँ।अनुराग जी, शुभकामनाओं के लिये आभार।सही कहा, जो अपने बस में है वह सब करने का प्रयास होना चाहिये। प्रार्थना गुप्ता जी ,शुभकामनाओं के लिये आभार।मुझे सत्य मार्ग का अनुसरण हो।अशोक मिश्र जी,शुभकामनाओं के लिये आभार।डॉ॰ मोनिका शर्मा जी,शुभकामनाओं के लिये आभार।आप सतत चिंतनशील और कर्मशील बने रहें ….. आपकी प्रार्थना फ़ले! राहुल सिंह जी,शुभकामनाओं के लिये आभार।

     
  18. सुज्ञ

    04/12/2010 at 6:05 अपराह्न

    अजित गुप्ता जी,शुभकामनाओं के लिये आभार।जितना समाज से पाया है अब उससे कहीं अधिक ही लौटा पाउँ तो सार्थक हो।मनोज कुमार जी, शुभकामनाओं के लिये आभार।आपकी शुभकामनाओं से यह जीवन यात्रा सरलता और ॠजुता से आगे बढे।अमित शर्मा जी ,शुभकामनाओं के लिये आभार।हां, निश्छल, निरामय, निर्मल, निर्दोष बालक सम जीवन बीते, पर ज्ञान पंडितों सा पाउं। अंशुमाला जी,शुभकामनाओं के लिये आभार।वही सच्ची और स्थाई खुशी चाहिए।अरविन्द जांगिड जी,शुभकामनाओं के लिये आभार।चिन्तनशीलता में प्रयत्नरत हूँ

     
  19. सुज्ञ

    04/12/2010 at 6:12 अपराह्न

    रश्मी रविजा जी,शुभकामनाओं के लिये आभार।हां आज तो आनंद, बाल्यावस्था सम ही उठाया। आपने यह चिंतन भी अच्छा दिया।सुशील बाकलीवास जी, शुभकामनाओं के लिये आभार।वन्दना जी, शुभकामनाओं के लिये आभार।चिन्तन को मनोबल प्रदान करने का पुनः आभार।

     
  20. सम्वेदना के स्वर

    04/12/2010 at 6:25 अपराह्न

    विलम्ब अवश्य हुआ है किंतु विस्मृत नहीं हुए आप! हंसराज जी, आपने अपने जन्मदिवस पर स्वयम को एक चिंतन दिया, इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है. हम दोनों बंधुओं, चैतन्य और सलिल, यही प्रार्थना करते हैं कि आपके जीवन में सदा चैतन्यता बनी रहे और जीवन निरंतन सलैल प्रवाह की तरह प्रवहमान रहे. जो ज्ञान ज्योति आपने अपने विचारों के माध्यम से प्रकाशित की है वह सदियों तक जन जन का मार्गदर्शन करती रहे!जन्मदिन की शुभकाम्नाएँ!

     
  21. सुज्ञ

    04/12/2010 at 6:57 अपराह्न

    नहिं चैतन्य,सलिल बंधुओं, कोई विलम्ब नहिं। इतनी खूबसूरत टिप्पणी नें मुझे आपार प्रेरणा बल प्रदान किया है।"जीवन में सदा चैतन्यता बनी रहे और जीवन निरंतन सलैल प्रवाहमान रहे"अन्तर में उतर गये बंधु आप, अब बांध रखुंगा दिल में… हंस सम शुभ्र स्वच्छ अन्तरमन है आप दोनो का। अनंत आभार!!!!!

     
  22. दीपक बाबा

    04/12/2010 at 7:50 अपराह्न

    बहुते हो गया ज्ञान-बिग्यान……..अभी टाइम होने वाला है – आठ के ठाठ……..बस. इसी के साथ – जन्मदिन की बहुत बहुत शुभाकामनायं

     
  23. संगीता स्वरुप ( गीत )

    04/12/2010 at 8:16 अपराह्न

    सुज्ञ जी , जन्मदिन की ढेरों बधाई और शुभकामनायें ….

     
  24. सुज्ञ

    04/12/2010 at 8:32 अपराह्न

    दीपक जी,आभार शुभेछा के लिये

     
  25. सुज्ञ

    04/12/2010 at 8:34 अपराह्न

    संगीता दीदी,बहुत ही आभार आपकी शुभकामनाएं, जीवन-संबल बनती है।

     
  26. Udan Tashtari

    04/12/2010 at 8:51 अपराह्न

    जन्म दिवस की अनेक शुभकामनायें और बधाई.

     
  27. विरेन्द्र सिंह चौहान

    04/12/2010 at 9:09 अपराह्न

    आपको जन्म दिवस पर ढेरों शुभकामनाएँ और बधाईयाँ। भगवान की कृपा और आशीर्वाद सदा आप पर बना रहै। आपकी सभी मंगलकामनाएँ पूरी हो और आप ताउम्र सेहतमंद रहें। ऐसी मेरी कामना है।

     
  28. Gourav Agrawal

    04/12/2010 at 9:10 अपराह्न

    आपको जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई ! ईश्वर आपको सफल जीवन प्रदान करें .बाकि आपसे निवेदन है की आजीवन बालक ही बने रहिएगा

     
  29. Gourav Agrawal

    04/12/2010 at 9:15 अपराह्न

    http://www.youtube.com/watch?v=ujtCB4OC0hcहेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~हेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~हेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~हेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~हेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~हेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~हेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~हेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~हेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~हेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~हेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~हेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~हेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~हेप्पी बर्थडे टू यू ~~~~~http://www.youtube.com/watch?v=wFh-rX_Sfhs

     
  30. Gourav Agrawal

    04/12/2010 at 9:16 अपराह्न

    ~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई ~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई~~~~~~~जन्मदिवस की हार्दिक बधाई~~~~~~~~~~

     
  31. महफूज़ अली

    04/12/2010 at 9:29 अपराह्न

    मुझे लगता है कि कुछ ऐसा ही चिंतन मुझे भी करना चाहिए… आपको जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई…

     
  32. deepak saini

    04/12/2010 at 10:07 अपराह्न

    सबसे पहले तो जन्मदिन की बधाई ईश्वर सबका भला चाहता है लेकिन बिना पापकर्म कराये मुक्त भी नही करता

     
  33. dhiru singh {धीरू सिंह}

    04/12/2010 at 10:14 अपराह्न

    आपको जन्मदिन की ढेरो शुभकामनाये .जिसने आपको मनुष्य रूप में भेजा है और जिस प्रायोजन से भेजा है वह अपने आप उस कार्य को आपसे करा लेगा . हम तो निमित है

     
  34. फ़िरदौस ख़ान

    04/12/2010 at 10:36 अपराह्न

    आपकी पोस्ट ने सोचने को मजबूर कर दिया…बहरहाल, जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं…

     
  35. प्रवीण शाह

    04/12/2010 at 11:09 अपराह्न

    …प्रिय सुज्ञ जी,सबसे पहले तो जन्मदिन की बधाई व शुभकामनायें…जिस विषय पर आप चिंतन कर रहे हैं… उस पर सोचा तो बहुत है और थोड़ा बहुत लिखा भी है अपने ब्लॉग पर… अब मैं तो वही बता पाउंगा जैसा खुद समझा है…Purpose of Human Life : Elementary My Dear ! … :)…

     
  36. shikha varshney

    05/12/2010 at 12:06 पूर्वाह्न

    जाही विधि राखे राम ,ताहि विधि रहिये :)जमन दिन की ढेरों शुभकामनाये.

     
  37. सुज्ञ

    05/12/2010 at 12:37 पूर्वाह्न

    समीर लाल जी,शुभेच्छाओं के लिये आभार।विरेन्द्र सिंह चौहान जी शुभेच्छाओं के लिये आभार। आपकी सभी मंगलकामनाएँ मेरा आधार है। गौरव अग्रवाल जी,शुभेच्छाओं के लिये आभार। स्वभाव से बालक बना रहूं, पर अज्ञानी न रहूँ यह आकांशा है। आपने मेरे जन्मदिन को पर्व में ही रूपांतरित कर दिया। धन्यवाद मित्र!! महफूज़ अली साहब, शुभेच्छाओं के लिये आभार।अवश्य चिंतन करें मित्र,नेक इन्सान का चिंतन भी नेक राह ही प्रकट करता है। दीपक सैनी जी,शुभेच्छाओं के लिये आभार।ईश्वर सबका भला चाहता है लेकिन बिना पापकर्म कराये मुक्त भी नही करता ।नन, ईश्वर नहिं करवाता। वह तो कहता है पापकर्म से निवृत हुए बिना मुक्ति नहिं।धीरू सिंह जी,शुभेच्छाओं के लिये आभार।हां, हम निमित भी है और कर्म करने के लिये स्वतंत्र भी, सही मार्ग का चुनाव तो हमें ही करना होगा।फ़िरदौस ख़ान जी, शुभेच्छाओं के लिये आभार।मनुष्य चेतन प्राणी है, उसके पास चिंतनशीलता है तो क्यों न चिंतन करें। प्रवीण शाह जी, शुभेच्छाओं के लिये आभार।आपकी यह पोस्ट में पहले पढ चुका था, आपके चिंतन में भी कुछेक खामियां है, कभी सरल मन और खुले दिमाग का वातावरण बना तो अवश्य चर्चा करेंगे।

     
  38. सुज्ञ

    05/12/2010 at 12:58 पूर्वाह्न

    शिखा जी,शुभकामनाओं के लिये आभार!!पुरूषार्थ कर्म न करने वालो का तो राम भी नहिं रखता।:)

     
  39. Gourav Agrawal

    05/12/2010 at 7:02 पूर्वाह्न

    @सुज्ञ जी प्रवीण शाह जी की पोस्ट पर कमेन्ट भी पढने हैं :)) चलिए 117 साल पीछे ….. वहां पर कुछ सुनना है हमें, संभवतया यही वो पोस्ट हो जिसका आपको इन्तजार था यहाँ देखें http://my2010ideas.blogspot.com/2010/12/blog-post_05.html

     
  40. Kunwar Kusumesh

    05/12/2010 at 8:48 पूर्वाह्न

    जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें सुज्ञ जी, अदभुत चिन्तन है आपका.

     
  41. Gourav Agrawal

    05/12/2010 at 9:26 पूर्वाह्न

    @सुज्ञ जी तकनीकी परेशानी की वजह से पोस्ट का लिंक बदलना पड़ा है …. आप यहाँ पढ़ कर अपने विचार अवश्य दें यहाँ http://my2010ideas.blogspot.com/2010/12/blog-post_2487.html

     
  42. दिगम्बर नासवा

    05/12/2010 at 6:41 अपराह्न

    जनम दिन मुबारक …. आप यूँ ही सार्थका लेखन करते रहें … मार्गदर्शन देते रहें …

     
  43. Amrita Tanmay

    05/12/2010 at 7:41 अपराह्न

    सौभाग्य से यहाँ आ गयी ..तो बिलम्ब से ही मेरी शुभकामना भी स्वीकार करें …आपको बहुत बहुत शुभकामनायें ..

     
  44. ZEAL

    05/12/2010 at 10:00 अपराह्न

    सुख हो या दुःख , स्थायी नहीं होते । जैसे दिन के बाद रात आती है , वैसे ही सुख के बाद दुःख आना भी तयशुदा है । जीवन का लक्ष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्धारित करते रहना पड़ता है। ज़रूरतमंदों को यथा-शक्ति मदद करना ही हमारा ध्येय होना चाहिए। सतत चिंतन में लगे रहना ही मानुष्य जीवन की सार्थकता है।जीवन का अंत मृत्यु होती है। और यही मृत्यु नव-जीवन की शुरुवात भी है। इसलिए जन्म-मृत्यु भी कभी न रुकने वाली काल-चक्र की परिणति है। सुन्दर लेख के लिए आभार।…………….आपको जन्मदिन की ढेरों शुभकामनायें ।आप जियें हज़ारों साल,साल के दिन हों पचास हज़ार । May this Birthday brings lot of happiness and sunshines in your life. .

     
  45. प्रतुल वशिष्ठ

    05/12/2010 at 10:16 अपराह्न

    .आपकी आयु और अनुभव तो वृहत निकले. आप तो बालक बनकर मुझ अनुज का ही गुरुत्व गुब्बारा फुलाते रहे. आपकी इस विनम्रता की वायु को मैं अपने गुरुत्व के आकाश में नहीं पहचान पाया. आप आशीर्वाद दिया करें लेने वाला कार्य अब मेरे लिये छोड़ दें. .

     
  46. सुज्ञ

    05/12/2010 at 11:18 अपराह्न

    कुंवर कुसुमेश जी, शुभकामनाओं के लिये आभारचिन्तन तो जरूरी है कुसुमेश जी।- दिगम्बर नासवा जी,शुभकामनाओं के लिये आभार।नासवा जी बस लिख लेता हूँ। _अमृता तन्मय जी, शुभकामनाओं के लिये आभार।सौभाग्य तो हमारा आप पधारे। -दिव्या जी, शुभकामनाओं के लिये आभार।जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति के लिये ही तो चिंतन है।-प्रतुल वशिष्ठ जी, शुभकामनाओं के लिये आभार।नहिं प्रतुल जी, वह मात्र गुरुत्व गुब्बारा नहिं, ज्ञानी का विनय करना ही होता है, और आपमें विद्वता के गुण है ही। फ़िर प्रौढ शिक्षा के तो पक्ष में है न आप। :).

     
  47. वाणी गीत

    06/12/2010 at 8:54 पूर्वाह्न

    जन्मदिन की बधाई व शुभकामनायें …देर से ही सही …स्वीकार कीजिये !

     
  48. सुज्ञ

    06/12/2010 at 12:07 अपराह्न

    वाणी गीत जी,शुभकामना सहित अमृत'वाणी' जब भी मिले ग्रहणीय होती है।बहुत बहुत आभार आपका!!

     
  49. पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

    06/12/2010 at 1:01 अपराह्न

    संसार समानता का अधिकारी है, सब समान नहीं हो सकते तो भी हम समानता के लिए सतत प्रयत्नशील रहते आये हैं, अमरता सम्भव नहीं है तो भी हमारी साँस-साँस अमरता के लिए सप्रयत्न या अप्रयत्न बेचैन रहती आई है. उसी प्रकार व्यक्ति, वस्तु या कार्य की सम्पूर्णता भी असम्भव है. पर हम सम्पूर्णता को लक्ष्य मानकर ही उस दिशा में यावदकिण्चिदपि दूरी तय कर पाते हैं और यही हमारी सिद्धि का रहस्य और मानक है. हम ईश्वर से यही कामना करेंगें कि इस जीवन में आपके द्वारा किए गए प्रयत्नों, सदप्रयासों का फल आपको यावदकिण्चिदपि सन्तोष देकर आपके किए गए प्रयासों की सार्थकता को सम्बल प्रदान करे. आप अपने जीवन की जिस यात्रा पर अग्रसारित हैं. इस सुखद अवसर पर एक मित्र के रूप में मेरी प्रभु से यही कामना है कि आप अपना कर्मप्रवण जीवन उस लम्बी अवधि तक ले जाने में सफल हों, जहाँ तक पहुँच कर भी सज्जीवन अशेष नहीं होता.कोटि कोटि शुभकामनाऎँ!!!

     
  50. प्रतुल वशिष्ठ

    06/12/2010 at 1:09 अपराह्न

    .मैंने अभी-अभी वत्स जी के विचार आशिर-वाक्य के रूप में पढ़े, पढ़कर अभिभूत हो गया. अब मुझे भी चाहिए ऐसा ही आशीर्वाद नित्य. मेरी भी इच्छा हो गई फिर से जन्म-दिवस मनाने की. इस तरह का उपहार पाने की. सर्वोत्तम विचार-उपहार मिला है आपको सुज्ञ जी. .

     
  51. Gourav Agrawal

    06/12/2010 at 1:15 अपराह्न

    प्रतुल जी की बात से सहमत हूँ मेरी भी इच्छा हो गई फिर से जन्म-दिवस मनाने की

     
  52. सुज्ञ

    06/12/2010 at 1:23 अपराह्न

    पंडित वत्स जी,आपके अनुत्तर सद्भावयुक्त शुभकामना संदेश से मेरे पुरूषार्थ रसायन में अभिवृद्धि हुई है। आप जैसे उत्तम मित्रों का स्नेह जीवन में सत्य शुभकर्म को प्रेरित करता है। परमार्थ (परम अर्थ)पानें का लक्ष्य बलवान बनता है। कोटि कोटि आभार!!

     
  53. Gourav Agrawal

    06/12/2010 at 1:27 अपराह्न

    एक बात और है सुज्ञ जी .. पोस्ट में आपने उम्र के बारे में बता के मुझे कन्फ्यूज सा कर दिया है , अब आपसे कुछ कहने में भी डर सा लगेगा| मेरी इस समस्या का कुछ समाधान करें | मेरे लिए आपकी उम्र अंदाजा भी लगाना मुश्किल था क्योंकि आपका स्वभाव ही इतना विनम्र है और आज तक मुझ मासूम को तो मुझसे ५ से १० साल बड़े ही "हम अनुभवी हैं " कह कह के डराते रहते हैं जैसे मैं अभी पैदा हुआ हूँ | सच तो ये है की पहली बार मेरा अंदाजा गलत गया होगा किसी की उम्र के बारे में .. जिसका क्रेडिट जाता है आपकी विनम्रता को

     
  54. सुज्ञ

    06/12/2010 at 1:29 अपराह्न

    प्रतुल जी,गौरव जी,वत्स जी का आशिर-वचन मुझे भी अभिभूत कर गया, आपने भी उन वचनों को सर्वोत्तम पुरस्कार कहकर मुझे ही पुनः शुभकामनाएं अर्पित की है। आपका कोटि कोटि आभार!! स्वजन मित्रों

     
  55. Gourav Agrawal

    06/12/2010 at 1:31 अपराह्न

    मतलब मेरा मन एनालाइज करने को हो रहा है …. कहीं पिछली चर्चाओं में मैंने कोई गड़बड़ बात ना कह दी हो ? .. मैं एडवांस में क्षमा मांग रहा हूँ … मैं तो नन्हा मुन्ना राही हूँ ना !!

     
  56. सुज्ञ

    06/12/2010 at 1:41 अपराह्न

    गौरव जी,एक ज्ञान का क्षेत्र ही ऐसा है जहां उम्र को नहिं विद्वत्ता को आदर दिया जाता है। आप स्वयं मुझसे अधिक ज्ञानी और कर्मठ है, यह अतिश्योक्ति नहिं। मैं वस्तुस्थिति स्वीकार करता हूं। अपने स्वाभिमान से कह दें मुझ से निर्भय रहे, मैं ज्ञान का विनय करना जानता हूँ। फ़िर भी हूं तो साधारण मानव ही यदि कभी भूल से अतिक्रमण कर जाऊं तो इतना अवश्य मान लेना वह मेरा सदैव का स्वभाव नहिं है।

     
  57. Gourav Agrawal

    06/12/2010 at 1:56 अपराह्न

    @सुज्ञ जीहमेशा की तरह आपकी टिप्पणी से निकले वैचारिक प्रकाश ने मन के "कन्फ्यूजन" जनित अँधेरे को हटाया .. आभारी हूँ आपका …. मेरी नज़रों में तो ज्ञानी वही हैं १. जिनके विचारों में आपसी टकराव ना हो२. जो सारांश में सब कुछ कह दे [ये मेरे लिए संभव नहीं :)) ]उदाहरण : आप, प्रतुल जी, अमित भाई जैसे मित्र मैं आपकी "ज्ञानी और कर्मठ" वाली बात पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करता रहूँगा , शायद कभी सफल भी हो जाऊं ? 🙂 इसी तरह अपने स्नेह की छाँव बनाए रखियेगा

     
  58. सुज्ञ

    06/12/2010 at 2:10 अपराह्न

    गौरव जी,@मेरी नज़रों में तो ज्ञानी वही हैं१. जिनके विचारों में आपसी टकराव ना होजिसके विचारों में विरोधाभास हो वह ज्ञानी कैसा?हां, सामने वाले को विरोधाभास लग भी सकता है, पर उसका समाधन-निवारण न पर पाए तो भी ज्ञानी कैसा?२. जो सारांश में सब कुछ कह दे [ये मेरे लिए संभव नहीं :)) ]सारांश प्रस्तूत कर देना तो आसान है, किन्तु विपक्ष को उससे सहमत कर देना महा-महा दुर्लभ। यह तो ज्ञानीयों के लिये भी असम्भव रहा है, मत-मतांतर ऐसी ही असहमतियों की तो उपज होता है।

     
  59. सुज्ञ

    06/12/2010 at 2:13 अपराह्न

    गौरव जी,हां, सामने वाले को विरोधाभास लग भी सकता है, पर उसका समाधन-निवारण न पर पाए तो भी ज्ञानी कैसा?को ऐसे पढें…हां, सामने वाले को विरोधाभास नजर आ भी सकता है, पर उसका निवारण व समाधन न कर पाए तो भी वह ज्ञानी कैसा?

     
  60. कुमार राधारमण

    09/12/2010 at 2:16 अपराह्न

    जन्म दिन की विलम्बित बधाई स्वीकार कीजिए।जिस तत्व की आप प्राप्ति करना चाहते हैं,वह सुख नहीं,आनन्द है। उसकी प्राप्ति केवल ध्यान से संभव है। इसी से स्थितप्रज्ञता की वह स्थिति पाना संभव है,जिसके बाद भौतिक साधनों का पास होना भी उतना ही बेमानी है जितना उसका अभाव।

     
  61. सुज्ञ

    09/12/2010 at 8:37 अपराह्न

    कुमार राधारमण जी,आभार आपका शुभकाम्नाओं के लिये।सत्य कहा यह खोज अनंत आनंद की ही है।

     
  62. सतीश सक्सेना

    31/12/2010 at 9:11 अपराह्न

    आप जैसे लोग कम हैं यहाँ …आशा है आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा ! नए साल पर आपके लिए मंगल कामनाएं !!

     
  63. कौशलेन्द्र

    06/08/2011 at 11:10 अपराह्न

    सुज्ञ जी ! अब तो अगला जन्म दिन आने वाला है. चलिए , पिछले वर्ष बुधवार, २९ दिसम्बर २०१० को अपने ब्लॉग में पोस्ट की गयी यह रचना आपको समर्पित कर रहा हूँ. मुझे इससे अच्छा और कोई उपहार आपके लिए सूझ नहीं रहा है. जीवनदौड़ लगाते देखा सबकोलगे दौड़ने संग में हम भी.चढ़ते देखा हमने सबको लगे चढ़ाई करने हम भी.तभी फिसलते देखा सबको लगने लगी सहज पीड़ा तब हमें फिसलने की ….अपने भी.व्यस्त हो गये हैं हम सब ही दौड़ लगाने …..चढ़ने…… ,गिरने और गिराने के निष्ठुर समरों में.बिना ये सोचे, बिना ये समझे लक्ष्य दौड़ का क्या है हमारी कौन दिशा है हमारे पथ की क्या होगी परिणति इस गति की.लक्ष्यहीन हो भाग रहे सबकहाँ और किस लिए न जाने किसके लिए…… किस लिए जी रहे हम में से ये कोई न जाने और अंत में इस जीवन के ……मिला शून्य जब इस मुट्ठी से प्रश्न एक तब उठा विराट ये क्यों आए थे यह जीवन ले ?उपलब्धि रही जीवन भर की क्या ?हुआ निरंतर प्रश्न विराट ये मौन हुए सारे प्रतियोगीछिपा शून्य में उत्तर है ज़ो नहीं सुनायी देता सबकोजन्म और भी लेने होंगे. हर जन्म साधना करते -करते जब सत्य शून्य का मिल पाएगा तब ज्ञान अचम्भित यह कर देगा-पाना है सब कुछ यदि हमको है उपाय सब कुछ खोना ही सोने को माटी मानो तो सारी माटी है सोना ही है लक्ष्य यही …सुख चरम यही.

     
  64. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

    04/12/2012 at 6:16 पूर्वाह्न

    दिन बीतते कहाँ पता लगते हैं| दो साल कब औ गुज़र गए पता ही न चला| एक नए जन्मदिन की हार्दिक बधाई!

     
  65. सञ्जय झा

    04/12/2012 at 11:06 पूर्वाह्न

    janm-din ki subh:kamnaye aapke sri-charnon me samarpit…….pranam.

     
  66. सुज्ञ

    04/12/2012 at 3:18 अपराह्न

    अनुराग जी, जन्मदिन की बधाई पर आपका आभार!!

     
  67. सुज्ञ

    04/12/2012 at 3:21 अपराह्न

    सञ्जय झा बन्धु,बहुत बहुत आभार इन शुभकामनाओं के लिए।श्री चरणों में? यह भी अच्छा है कदमो से शुभकामनाएं उठाने के लिए झुकना पडेगा, कमर की कडकाई कुछ कम होगी। 🙂

     
  68. Er. Shilpa Mehta : शिल्पा मेहता

    04/12/2012 at 4:54 अपराह्न

    जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई 🙂

     
  69. सुज्ञ

    04/12/2012 at 5:26 अपराह्न

    बहुत बहुत आभार शिल्पा जी!! 🙂

     
  70. प्रतुल वशिष्ठ

    04/12/2012 at 11:46 अपराह्न

    हे आदरणीय, आपकी शाब्दिक विनम्रता से ही आपके स्वभाव का अनुमान लगाता रहा। इसी आधार पर आपकी आयु न जाने मुझे क्यों बहुत समय तक वर्तमान आयु से ठीक आधी लगती रही। किसी भी विषय पर चर्चा करना, पुष्ट तर्क देते रहने के बावजूद अपना जिज्ञासु भाव भी न खोने देना – इन दोनों का एक साथ दिखना आपकी आयु को संशय में रखता रहा। मैं जानता हूँ यदि कोई व्यक्ति तार्किक बुद्धि होता है तो उसमें स्वभावतः अहंकार झलकने लगता ही है। चाहे वह जितना उसे दबाने की चेष्टा करे कहीं न कहीं से प्रकट हो ही जाता है। और यह भी सच है कि जिज्ञासु भाव का व्यक्ति किसी भी जिज्ञासा को दूसरे के द्वारा शांत होने के अवसर अधिक बनाता है न कि अपनी बुद्धि से विलक्षण तर्क करके अपना पांडित्य प्रकट करता है। किन्तु आपमें इन दोनों गुणों का मणिकाञ्चन संयोग देखा।जब आपने अपनी शतकीय खेल ली तभी इस ओर ध्यान गया था अन्यथा जब आपसे आपके विचारों के कारण जुड़ा था तब आपको कॉलेज का मेधावी छात्र मात्र ही मानता था। सही भी है हम आयु में जितने भी बड़े हो जाएँ — प्रेम और आत्मीयता एक बच्चे की तरह करें। कर्तव्य व सामाजिक दायित्व एक युवा की तरह निभाएँ। जन-जागृति और सत्य के प्रति हठ एक प्रौढ़ मष्तिष्क के साथ करें। क्षमा भाव और शालीनता एक बुजुर्ग व्यक्ति की तरह न खोने दें।ब्लॉग जगत के माध्यम से आपको जाना और यह मेरे जीवन की एक अद्वितीय उपलब्धि है जिसे मैं कभी खोना नहीं चाहूँगा। आपका आज़ की तारीख में माँ के गर्भ से जन्म बेशक हुआ हो लेकिन आपका जन्म ब्लॉग-जगत में 29 अप्रैल को हुआ था। वही तारीख थी जो ब्लॉग जगत के स्मरणीय रहेगी। प्रसन्नता और उत्सव मनाने के अवसर जितने अधिक गढ़े जाएँ उतने अच्छे। 4 दिसम्बर, 29 अप्रैल, या फिर निरामिष के अवतरण वाली तारीख सभी विशेष अवसर हैं। ये ब्लॉग जगत की धरोहर हैं। ऎसी धरोहर में जितनी वृद्धि हो उतनी कम। हे आदरणीय सुज्ञ जी, मैं इस अवसर यही कामना करूँगा कि आपकी हितकर वाणी ब्लॉग-सन्देश रूप में लम्बे समय तक मिलती रही। आपसे जैसे चरित्रों का चरण-वंदन करना तीर्थ करने के समान है। और आपकी मित्रता पाना पूर्व जन्म के पुण्यों का संचित फल है।

     
  71. प्रतुल वशिष्ठ

    04/12/2012 at 11:53 अपराह्न

    सुधार :- अपनी शतकीय पारी खेल ली – वही तारीख थी जो ब्लॉग जगत में स्मरणीय रहेगी। – इस अवसर पर यही कामना

     
  72. सुज्ञ

    05/12/2012 at 2:37 पूर्वाह्न

    सरल हृदय प्रतुल जी,सबसे पहले शुभकामनाओँ के लिए आभार मित्र!!आपकी टिप्पणी मेरे अहँकार और आत्मश्लाधा को प्रबल करने के लिए पर्याप्त खाद-पानी थी. आपने तो मोहनिन्द्रा वश करने का पर्याप्त प्रबन्ध किया था.'चरण-वंदन' 'तीर्थ' 'पुण्यों का संचित फल'???. साधारण मित्र रहने दो यार!! कोई दो राय नही संघर्षरत हैँ. बस अच्छे जीवन मूल्योँ को धार देने प्रयास भर है.हाँ आपने सही कहा……"सही भी है हम आयु में जितने भी बड़े हो जाएँ — प्रेम और आत्मीयता एक बच्चे की तरह करें। कर्तव्य व सामाजिक दायित्व एक युवा की तरह निभाएँ। जन-जागृति और सत्य के प्रति हठ एक प्रौढ़ मष्तिष्क के साथ करें। क्षमा भाव और शालीनता एक बुजुर्ग व्यक्ति की तरह न खोने दें।" इस व्यवहार पर टिके रहना अभिलाषा अवश्य है.आप तो सरल हृदय है जो इतना स्वमान मर्दन कर खुल कर प्रश्ंसा किए है पर हितचिंतक होँ तो कृपया फिर कभी मेरे ईगो को सहलाकर चेताने की ऐसी भूल न करेँ. श्लाधा नही स्नेह बनाए रखेँ. प्रशँसा के लिए नही, शुभकामनाओँ के लिए एक बार पुनः आभार!!

     
  73. सुज्ञ

    05/12/2012 at 2:40 पूर्वाह्न

    सुधार…..बस अच्छे जीवन मूल्योँ को धार देने का प्रयास भर है.

     

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ज्ञानदत्त पाण्डेय का हिन्दी ब्लॉग। मैं गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर रेलवे अफसर।

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