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टिप्पणियां स्वतः उछल-उछल कर व्यंग्य करती है!!

01 अगस्त

 

प्रविष्ठियाँ टिप्पणीयों से बल पाकर, आस पास बैठ जाती है। सहसा पडौसी प्रविष्ठियों पर व्यंग्य बाण चलाने लगती है। संख्या के आधार पर समूह में जा बैठती है,और अरस-परस की पोस्टों पर ताने मारती है। ये टिप्पणियां अन्य पोस्टों को विचित्र प्रतिक्रिया प्रकट करने को बाध्य करती है। 

रविवार शाम 7/20 , “चिठ्ठाजगत” पर टॉप टिप्पणी सूची , नजारा कुछ यह था, दो-दो-तीन पोस्ट शिर्षक को एक साथ पढ आप भी आनंद लिजिये……… 

 

उदासी मन का एक्स रे होती है [35] 

दोस्ती का एक दिन [25] 

 

वो सारे ज़ख़्म पुराने, बदन में लौट आए [21] 

भैया जरा बच के , जाना दिल्ली में, -तारकेश्वर गिरी. [20] 

 

रविवार भोर ६ बजे [20] 

…..अब आप भी प्रेम की रूहानी यादों में तनिक खो जाईये तो बात बनें! [19] 

 

द डे व्हेन एवरीथिंग वेंट रॉंग…..वेल..नॉट एवरीथिंग 🙂 [19] 

सावन की बरसात [18] 

 

फ्रैंडशिप डे -ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगें [17] 

The real Guide सच का जानने और बताने वाला केवल वह मालिक है . वही मार्गदर्शन करने का सच्चा अधिकारी है। कर्तव्य और अकर्तव्य का सही ज्ञान वही कराता है। -Anwer Jamal [16] 

 

पहचान पायेंगे क्या? [16] 

तेरे चाहने वाले, तमाम बढ़ गए है[16] 

 

फ्रैंडशिप- डे की बधाई [15] 

गड्ढे में हाथी [15] 

सनडे मानसिक फीस्ट …. हंसते क्यों नहीं हो ? [14] 

 

ब्लॉग-गुरु ! कैरान्वी भाई, कहाँ हो आजकल आप !! [12] 

घर लौटने का समय [11] 

सर्दी की गुनगुनी धूप में ममता भरी रजाई अम्मा -सतीश सक्सेना [11] 

नेता और कुत्ता [11] 

फ्रेण्डशिप-डे: ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे [11] 

 

आराम की ज़रूरत है…! [10] 

शेर [10] 

अपने ही घर में मुझे सब , मेहमान बना देते हैं…………अजय कुमार झा [10] 

 

परिशिष्ट: 

 

हिंदी सबके लिए [13] 

यह कौन सी भाषा है विभूति जी? [13] 

 

आत्मा कहाँ जाती है ? [22] 

रविवार भोर ६ बजे [22] 

 

खाओ मनभाता, पहनो जगभाता और लिखो……. [11] 

सलामत रहे दोस्ताना हमारा [11]

 “… खुद चलके आती नही” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”) [11] 

 

अन्तिम तुर्रा……॥

 

हमारे ज्ञान की परिधि कितनी सीमित है—– [14] 

टिप्पणियां स्वतः आ आकर व्यंग्य करती है!! [14] 

 

सामग्री: ज्यों की त्यों चिठ्ठाजगत से साभार। विद्वानों के नाम आना ‘कट-पेस्ट’ संयोगमात्र है,कृपया हास्य विनोद से लें । 🙂

 

श्रेष्ठ सटीक प्रति्क्रिया, ……

 

“इसे कहते हैं.. पहने कुर्ता पर पतलून आधा फागुन,आधा जून. और तुर्रा ये कि किसी का कुर्ता,किसी की पतलून..”
 —सम्वेदना के स्वर 
“हिन्दी ब्लॉगों की टिप्पणी ‘दशा’ पर अब तक की सबसे सार्थक, सटीक, अर्थयुक्त टिप्पणी 🙂 “
 —रवि रतलामी

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टैग: ,

31 responses to “टिप्पणियां स्वतः उछल-उछल कर व्यंग्य करती है!!

  1. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    01/08/2010 at 8:15 अपराह्न

    हा! हा!! हा!!!बचपन में ऐसा बहुत सा चुटकुला बनता था..जापान में विश्व सुंदरी सम्मेलननेता जी जापान रवाना.

     
  2. सुज्ञ

    01/08/2010 at 8:25 अपराह्न

    बहुत खुब

     
  3. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    01/08/2010 at 8:27 अपराह्न

    जी हाँ!मौन होकर भी टिप्पणियाँ बहुत कुछ कह देती हैं!

     
  4. आशीष मिश्रा

    01/08/2010 at 8:32 अपराह्न

    bahot badhiya

     
  5. Shah Nawaz

    01/08/2010 at 9:36 अपराह्न

    🙂 Mast Pakda hai aapne

     
  6. VICHAAR SHOONYA

    01/08/2010 at 9:52 अपराह्न

    bhai vah badi achchhi tukbandi hai.

     
  7. शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद''

    01/08/2010 at 10:07 अपराह्न

    रोचक………..दिलचस्प………सृजन के लिए बधाई.

     
  8. अजय कुमार झा

    01/08/2010 at 11:37 अपराह्न

    बढिया लपेटे हैं सुज्ञ जी ….हा हा हा… एकदम सूट दुपट्टा टाईप मैच हुआ है ..कंट्रास्ट में …..हा हा हा

     
  9. सम्वेदना के स्वर

    02/08/2010 at 12:14 पूर्वाह्न

    इसे कहते हैं..पहने कुर्ता पर पतलूनआधा फागुन,आधा जून.और तुर्रा ये कि किसी का कुर्ता,किसी की पतलून..

     
  10. अनामिका की सदायें ......

    02/08/2010 at 12:17 पूर्वाह्न

    अरे यहाँ तो आत्मा भी लपेटे में आ गयी …कमाल है !

     
  11. सुज्ञ

    02/08/2010 at 12:38 पूर्वाह्न

    सलिल जीक्या गजब की टिप्पनी आपकी!

     
  12. Archana

    02/08/2010 at 1:12 पूर्वाह्न

    और ये एकदम अभी की —-फ्रेण्डशिप-डे: ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे [13]नेता और कुत्ता [13]आराम की ज़रूरत है…! [13]

     
  13. Archana

    02/08/2010 at 1:14 पूर्वाह्न

    और ये भी —तस्वीरें बोलती हैं शब्दों से ज्यादा [11]कभी मिली थी एक मासूम नाजुक सी लड़की [10]

     
  14. सुज्ञ

    02/08/2010 at 1:19 पूर्वाह्न

    अर्चनाजी,आप भी ?क्या खूब!!

     
  15. Udan Tashtari

    02/08/2010 at 8:21 पूर्वाह्न

    सही है !!! तुर्रा ये कि किसी का कुर्ता,किसी की पतलून.. 🙂

     
  16. Raviratlami

    02/08/2010 at 9:33 पूर्वाह्न

    हिन्दी ब्लॉगों की टिप्पणी 'दशा' पर अब तक की सबसे सार्थक, सटीक, अर्थयुक्त टिप्पणी 🙂

     
  17. शिवम् मिश्रा

    02/08/2010 at 9:50 पूर्वाह्न

    एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं!आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !

     
  18. सुज्ञ

    02/08/2010 at 10:14 पूर्वाह्न

    रवि जी,व्यंग्य पारखीयों को मेरा नमन पहुंचे।

     
  19. सुज्ञ

    02/08/2010 at 10:15 पूर्वाह्न

    शिवम जी,शुक्रिया!!

     
  20. वाणी गीत

    02/08/2010 at 1:18 अपराह्न

    गज़ब का कॉम्बिनेशन है …!

     
  21. वन्दना

    02/08/2010 at 2:15 अपराह्न

    जय हो टिप्पणियों की।

     
  22. सुज्ञ

    02/08/2010 at 2:24 अपराह्न

    ताज़ातरीन…………कभी मिली थी एक मासूम नाजुक सी लड़की [10]जो न समझे नज़र की भाषा को [10]चल रहा हूं अकेला दोस्तो= गज़ल [10]लायक़ – नालायक़ [10]

     
  23. P.N. Subramanian

    02/08/2010 at 2:32 अपराह्न

    खूबसूरत!

     
  24. Arvind Mishra

    02/08/2010 at 2:35 अपराह्न

    अरे वाह !

     
  25. कविता रावत

    02/08/2010 at 6:57 अपराह्न

    Tipaniyon ka jawab nahi!

     
  26. सुज्ञ

    02/08/2010 at 7:46 अपराह्न

    मुझे…बहुत पहले से उन कदमों की आहट…. [40]थी कि समीर भाई आयेगें और टिप्पणियों में पछाड देंग॥सूखे फूल [36]भी भारी पडेंगे।और धडाधड टिप्पणियों सेसंबंध-विच्छेद [35]हो जायेगा,इसका किटिप्पणियां स्वतः आ आकर व्यंग्य करती है!! [29]यह आवाज़ कहां से आई……उल्टा चोर कोतवाल को डांटे—ये भी खूब रही [27]

     
  27. पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

    02/08/2010 at 9:44 अपराह्न

    🙂 क्या खूब लपेटा है…:)

     
  28. रंजना

    03/08/2010 at 7:17 अपराह्न

    बढ़िया लिंक जुटाए आपने……

     
  29. राजभाषा हिंदी

    03/08/2010 at 10:45 अपराह्न

    बहुत अच्छी प्रस्तुति।राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

     

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ज्ञानदत्त पाण्डेय का हिन्दी ब्लॉग। मैं गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर रेलवे अफसर।

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