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॥उपकार॥

23 जुलाई

उपकार
आत्म प्रशंसा में जुटे, दिखते है सब लोग ।
अपने सुख के वास्ते, ये बांट रहे हैं रोग ॥1॥


पर उपकार तूं किहा करे, कर अपनो उपकार ।
अहम घटे समता बढे, देह धरे का सार ॥2॥


तन की आंखें बंद कर, मन की आंखें खोल ।
मुख से बाते तब कर, जब ले उसको तोल ॥3॥

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4 टिप्पणियाँ

Posted by on 23/07/2010 in बिना श्रेणी

 

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4 responses to “॥उपकार॥

  1. Shah Nawaz

    23/07/2010 at 8:42 अपराह्न

    Behtreen

     
  2. संगीता स्वरुप ( गीत )

    23/07/2010 at 10:04 अपराह्न

    शिक्षाप्रद दोहे

     
  3. Mahak

    23/07/2010 at 10:13 अपराह्न

    बहुत बढ़िया

     
  4. सुज्ञ

    23/07/2010 at 10:23 अपराह्न

    शाह नवाज़ साहब,संगीता जी,महक जी,उत्साहवर्धन के लिये आभार।

     

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ज्ञानदत्त पाण्डेय का हिन्दी ब्लॉग। मैं गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर रेलवे अफसर।

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