RSS

संतोष

22 जुलाई
मनुज जोश बेकार है, अगर संग नहिं होश ।
मात्र कोष से लाभ क्या, अगर नहिं संतोष ॥1॥

दाम बिना निर्धन दुःखी, तृष्णावश धनवान ।
कहु न सुख संसार में, सब जग देख्यो छान ॥2॥

धन संचय यदि लक्ष्य है, यश मिलना अति दूर।
यश – कामी को चाहिये, त्याग शक्ति भरपूर ॥3॥
Advertisements
 

टैग: , ,

11 responses to “संतोष

  1. Indranil Bhattacharjee ........."सैल"

    22/07/2010 at 8:54 अपराह्न

    अति सुन्दर विचार ! लेखनी भी काबिले तारीफ़ !

     
  2. अनामिका की सदायें ......

    22/07/2010 at 9:13 अपराह्न

    आप की रचना 23 जुलाई, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.http://charchamanch.blogspot.com आभार अनामिका

     
  3. सुज्ञ

    22/07/2010 at 9:15 अपराह्न

    धन्यवाद्……………अभार…………॥ इन्द्रनील ज़ी

     
  4. सुज्ञ

    22/07/2010 at 9:23 अपराह्न

    धन्यवाद……………अभार…………॥ अनामिका ज़ी

     
  5. डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'/Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'

    23/07/2010 at 2:38 अपराह्न

    साहित्य को समृद्ध करने वाली रचना, आभार! यदि आपकी अनुमति हो तो आपकी रचनाओं को हम आपके नाम से प्रिंट मीडिया में उपयोग कर सकते है. एक बार फिर से आभार और साधुवाद!

     
  6. संगीता स्वरुप ( गीत )

    23/07/2010 at 3:15 अपराह्न

    संदेशात्मक दोहे..बहुत अच्छे लगे

     
  7. सुज्ञ

    23/07/2010 at 6:38 अपराह्न

    पुरुषोत्तम जी,आप उपयोग कर सकते है, बस ध्यान रहे इसका उपयोग व्यंग्य की तरह न हो।

     
  8. सुज्ञ

    23/07/2010 at 6:40 अपराह्न

    संगीता स्वरूप जी,आभार!!

     
  9. sanu shukla

    24/07/2010 at 5:32 अपराह्न

    bahut sundar aur sandesh parak dohe hai…!!

     
  10. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

    26/03/2012 at 7:53 पूर्वाह्न

    सुन्दर रचना, सुन्दर विचार! हार्दिक आभार!

     

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

 
गहराना

विचार वेदना की गहराई

॥दस्तक॥

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

तिरछी नजरिया

हितेन्द्र अनंत का दृष्टिकोण

मल्हार Malhar

पुरातत्व, मुद्राशास्त्र, इतिहास, यात्रा आदि पर Archaeology, Numismatics, History, Travel and so on

मानसिक हलचल

ज्ञानदत्त पाण्डेय का हिन्दी ब्लॉग। मैं गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर रेलवे अफसर।

सुज्ञ

चरित्र विकास

Support

WordPress.com Support

Hindizen - हिंदीज़ेन

Hindizen - हिंदीज़ेन : Best Hindi Motivational Stories, Anecdotes, Articles...

The WordPress.com Blog

The latest news on WordPress.com and the WordPress community.

%d bloggers like this: