RSS

धार्मिक कट्टरता व पाखण्ड पर शक किसे रास नहीं आता?

30 जून
  • मैने एक ब्लॉग पर कुछ यह टिप्पनी कर दी……
“तजुर्बा हमारा यह है कि लोग पहले, अमन व शान्ति के सन्देश को सौम्य भाषा में ले आते है और आखिर में कट्टरवादी रूख अपना लेते है। एक पूरा मुस्लिम ब्लॉगर गुट कुतर्कों के द्वारा  इस्लाम के प्रचार में सलग्न है। यह पहले से ही आपकी नियत पर शक नहीं हैं, पर यदि आप इस्लाम के प्रति फ़ैली भ्रान्तियों को तार्किक व सोम्य ढंग से दूर करने का प्रयास करेंगे तो निश्चित ही पठनीय रहेगा।“
सलाह देने का दुष्परिणाम यह हुआ कि शक करने पर उन्होने एक पोस्ट ही लगा दी…
    • शक और  कट्टरता पर उनका मन्तव्य………
    “कुछ लोगों को यह अमन का पैग़ाम शायद समझ मैं नहीं आया, उनको शक है कहीं यह आगे जाके कट्टरवाद मैं ना बदल जाए. शक अपने आप मैं खुद एक बीमारी है, जिसका इलाज सभी धर्म मैं करने की हिदायत दी गयी है. यह कट्टरवाद है क्या, इसकी परिभाषा मुझे आज तक समझ मैं नहीं आयी? अपने धर्म को मान ना , उसकी नसीहतों पे चलना, अगर कट्टरवाद है, तो सबको कट्टर होना चहिये. हाँ अगर अपने धर्म को अच्छा बताने के लिए , दूसरों के धर्म मैं, बुराई, निकालना, बदनाम करना, धर्म के नाम पे नफरत फैलाना कट्टरवाद कहा जाता है, तो यह महापाप है,”
      “शक अपने आप मैं खुद एक बीमारी है” ?

    नहीं!!, शक कभी बीमारी नहीं होता, शक वो हथियार है, जिसके रहते कोई धूर्त, पाखण्डी अथवा ठग अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाता। किसी भी शुद्ध व सच्चे ज्ञान तक पहुंचने में संशय सीढ़ी का काम करता है। इन्सान अगर शक संशय पर आधारित जिज्ञासा न करे तो सत्य ज्ञान तक नहीं पहुँच सकता। विभिन्न आविष्कार और विकास संशययुक्त जिज्ञासा से ही अस्तित्व में आते है। दिमागों के दरवाजे अंध भक्ति पर बंद होते है और शक के कारण खुलते है। संशय से ही समाधान का महत्व है। शक को मनोरोग मानने वाले  अन्ततः  अंधश्रद्धा के रोग से ग्रसित  होकर मनोरोगी बन जाने की सम्भावनाएं प्रबल है ।

    धूर्त अक्सर अपने पाखण्ड़ को छुपाने के लिए सावधान को शक्की होने का उल्हाना देकर, शक को दबाने का प्रयास करते है इसी मंशा से शक व संशय को बिमारी कहते है।

    • कट्टरता की परिभाषा………॥

    अपने परम सिद्दांतो पर सिद्दत से आस्थावान रहना कट्टरता नहीं है, वह तो श्रद्धा हैं। सत्य तथ्य पर प्रत्येक मानव को अटल ही रहना चाहिये।
    दूसरों के धर्म की हीलना कर, बुराईयां (कुप्रथाएं) निकाल, अपने धर्म की कुप्रथाओं को उंचा सिद्ध करना भी कट्टरता नहीं, कलह है। वितण्डा  है।

    कट्टरता यह है……
    एक व्यक्ति शान्ति का सन्देश देता है, जोर शोर से ‘शन्ति’  ‘शन्ति’ शब्दों का उच्चारण करता है,
    दूसरा व्यक्ति मात्र मन में शान्ति धारण करता है। अब पहला व्यक्ति जब दुसरे को शान्ति- शान्ति आलाप करने को मज़बूर करता है, और कहता है कि जोर शोर से बोल के दिखाओ,  तो ही तुम शान्तिवान!  इस तरह दिखावे की शान्ति लादना ही कट्टरता हैं। विवेकशील व चरित्रवान रहना  व्यक्तिगत विषय है। गु्णों का भी जबरदस्ती किसी पर आरोहण नहीं होता।

    अर्थात्, किसी भी तरह के सिद्धान्त, परम्पराएं, रिति-रिवाज दिखावे के लिये, बलात दूसरे पर लादना कट्टरता हैं।

    केवल कथनी से नहिं, बनता कोई काम।
    कथनी करनी एक हो, होगा पूर्ण विराम ॥
     
    3 टिप्पणियाँ

    Posted by on 30/06/2010 in बिना श्रेणी

     

    टैग:

    3 responses to “धार्मिक कट्टरता व पाखण्ड पर शक किसे रास नहीं आता?

    1. दीर्घतमा

      30/06/2010 at 12:52 अपराह्न

      Islam kewal brebiyan rashtrabad ke atirikt kuchh nahi .jiwan bhar muhammad sahab ne yahi kiya .ki arbi bhasha me hi khuda samajhta hai .

       
    2. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

      30/06/2010 at 11:05 अपराह्न

      केवल कथनी से नहिं, बनता कोई काम।कथनी करनी एक हो, होगा पूर्ण विराम ॥–बहुत सुन्दर!

       
    3. Monika Jain

      09/06/2013 at 4:49 अपराह्न

      Awesome Reply …Totally Agree

       

    एक उत्तर दें

    Fill in your details below or click an icon to log in:

    WordPress.com Logo

    You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

    Twitter picture

    You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

    Facebook photo

    You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

    Google+ photo

    You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

    Connecting to %s

     
    गहराना

    विचार वेदना की गहराई

    ॥दस्तक॥

    गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं

    तिरछी नजरिया

    हितेन्द्र अनंत का दृष्टिकोण

    मल्हार Malhar

    पुरातत्व, मुद्राशास्त्र, इतिहास, यात्रा आदि पर Archaeology, Numismatics, History, Travel and so on

    मानसिक हलचल

    ज्ञानदत्त पाण्डेय का हिन्दी ब्लॉग। मैं यह ब्लॉग लिखने के अलावा गाँव विक्रमपुर, जिला भदोही, उत्तरप्रदेश, भारत में रह कर ग्रामीण जीवन जानने का प्रयास कर रहा हूँ। रेलवे से ज़ोनल रेलवे के विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर्ड अफसर।

    सुज्ञ

    चरित्र विकास

    Support

    WordPress.com Support

    Hindizen - हिंदीज़ेन

    Hindizen - हिंदीज़ेन : Best Hindi Motivational Stories, Anecdotes, Articles...

    The WordPress.com Blog

    The latest news on WordPress.com and the WordPress community.

    %d bloggers like this: